लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, वयस्क जोड़ों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश
प्रयागराज। लिव-इन रिलेशनशिप में रह रहे वयस्क जोड़ों की सुरक्षा को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक अहम और महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि राज्य की यह संवैधानिक जिम्मेदारी है कि वह प्रत्येक नागरिक के जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता की रक्षा सुनिश्चित करे, चाहे वह किसी भी सामाजिक या धार्मिक पृष्ठभूमि से संबंधित क्यों न हो।
राज्य का दायित्व: जीवन और स्वतंत्रता की रक्षा अनिवार्य
न्यायमूर्ति विवेक सिंह की एकल पीठ ने अपने आदेश में कहा कि लिव-इन रिलेशनशिप में रह रहे वयस्कों को भी संविधान के तहत समान अधिकार प्राप्त हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी भी व्यक्ति के जीवन और स्वतंत्रता की रक्षा करना राज्य का मूल कर्तव्य है और इसमें किसी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जा सकती।
ये भी पढ़ें संभल: सड़क पर दौड़ता ट्रक बना 'आग का गोला', केमिकल और घास लदे वाहन में लगी भीषण आग से मचा हड़कंपधर्म या सामाजिक पृष्ठभूमि के आधार पर भेदभाव अस्वीकार्य
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि यदि दो वयस्क अपनी इच्छा से साथ रहना चाहते हैं, तो उन्हें केवल धर्म, जाति, पंथ या सामाजिक पृष्ठभूमि के आधार पर उनके मौलिक अधिकारों से वंचित नहीं किया जा सकता। न्यायालय ने कहा कि संविधान सभी नागरिकों को समान अधिकार और स्वतंत्रता प्रदान करता है, और इन अधिकारों का सम्मान करना सभी संस्थाओं और प्रशासन की जिम्मेदारी है।
संवैधानिक अधिकारों की रक्षा पर कोर्ट का जोर
कोर्ट ने यह भी कहा कि समाज या परिवार के दबाव के कारण किसी भी वयस्क जोड़े के अधिकारों का हनन नहीं किया जा सकता। यदि किसी जोड़े को किसी प्रकार का खतरा महसूस होता है, तो प्रशासन को तत्काल उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि व्यक्तिगत स्वतंत्रता और जीवन का अधिकार संविधान के सबसे महत्वपूर्ण मौलिक अधिकारों में से एक है।
प्रशासन को दिए स्पष्ट निर्देश, सुरक्षा सुनिश्चित करने को कहा
हाईकोर्ट ने संबंधित प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिए कि ऐसे मामलों में संवेदनशीलता और गंभीरता के साथ कार्रवाई करें और वयस्क जोड़ों की सुरक्षा सुनिश्चित करें। कोर्ट ने कहा कि कानून का उद्देश्य नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करना है, न कि उनके व्यक्तिगत जीवन में अनावश्यक हस्तक्षेप करना।
फैसले को माना जा रहा है महत्वपूर्ण और मार्गदर्शक
इलाहाबाद हाईकोर्ट का यह फैसला लिव-इन रिलेशनशिप में रह रहे वयस्क जोड़ों के अधिकारों की सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यह निर्णय न केवल व्यक्तिगत स्वतंत्रता को मजबूती देता है, बल्कि समाज और प्रशासन को भी संविधान के मूल्यों और नागरिक अधिकारों का सम्मान करने का स्पष्ट संदेश देता है।
रॉयल बुलेटिन से जुड़ें:
देश-प्रदेश की ताज़ा ख़बरों को सबसे पहले पढ़ने के लिए हमारे सोशल मीडिया हैंडल को फॉलो करें:
आपको यह खबर कैसी लगी? अपनी राय नीचे कमेंट बॉक्स में ज़रूर दे। आपकी राय रॉयल बुलेटिन को और बेहतर बनाने में बहुत उपयोगी होगी।
लेखक के बारे में
अभिषेक भारद्वाज एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें 11 वर्षों से मुरादाबाद मंडल की पत्रकारिता का व्यापक अनुभव है। वे मुरादाबाद के प्रतिष्ठित एसएस न्यूज़ चैनल में संपादकीय प्रभारी जैसे महत्वपूर्ण पद पर कार्य कर चुके हैं। मुरादाबाद की राजनीतिक, सामाजिक और स्थानीय खबरों पर उनकी गहरी पकड़ है। वर्तमान में वे रॉयल बुलेटिन के मुरादाबाद जिला प्रभारी के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

टिप्पणियां