फरवरी में सब्जी की खेती का बड़ा मौका, गर्मी के सीजन में मुनाफा तय करने वाली अहम बुवाई
फरवरी का दूसरा सप्ताह खेती के लिहाज से अहम होता है क्योंकि इसी समय लिए गए फैसले गर्मी की कमाई तय करते हैं। खेतों में अभी जो बोया जाएगा वही अप्रैल मई में मंडी का भाव तय करेगा।
फरवरी की बुवाई क्यों आज जरूरी है
करेला और लोबिया की स्थिर मांग
करेला साल भर बिकने वाली सब्जी है लेकिन गर्मियों में इसकी खपत तेजी से बढ़ती है। खेतों में इस समय बोए गए करेले अप्रैल में तुड़ाई देने लगते हैं। व्यापारियों के अनुसार मध्यम आकार और ज्यादा कांटों वाला करेला मंडी में जल्दी उठता है। वहीं लोबिया कम लागत में तैयार होने वाली फसल है। बीज और खाद पर खर्च सीमित रहता है और तुड़ाई लगातार मिलती है। जमीन पर बोई जाने वाली किस्में छोटे किसानों के लिए आसान रहती हैं जबकि मचान वाली किस्में लंबे समय तक उत्पादन देती हैं।
कद्दू और लौकी में भंडारण का फायदा
कद्दू उन सब्जियों में है जिसे तोड़ने के बाद भी कुछ समय तक रखा जा सकता है। फरवरी में बोया गया कद्दू मई में तैयार होकर उस समय बिकता है जब बाजार में कमी शुरू होती है। बड़े आकार वाले कद्दू होटल और थोक खरीदार लेते हैं। लौकी की बात करें तो मध्यम और लंबी दोनों किस्मों की मांग अलग अलग बाजारों में बनी रहती है। सही समय पर तुड़ाई करने वाले किसानों को रोजाना नकद बिक्री मिलती है।
बैंगन और भिंडी का रोज का बाजार
बैंगन की खेती आसान मानी जाती है लेकिन कई क्षेत्रों में बैक्टीरियल विल्ट की समस्या सामने आती है। ऐसे में रोग सहनशील किस्में लगाने वाले किसानों का नुकसान कम रहता है। चमकदार रंग और एक जैसा आकार मंडी में भाव बढ़ाता है। भिंडी को किसान चलती एटीएम कहते हैं क्योंकि रोज तुड़ाई होती है और रोज पैसा मिलता है। फरवरी की बुवाई से गर्मियों में लगातार सप्लाई बनी रहती है।
खीरा और ग्वार की गर्मी में मांग
गर्मी बढ़ते ही खीरे की मांग शहरों में तेज हो जाती है। सलाद और ठंडे उपयोग के कारण इसका भाव स्थिर रहता है। फरवरी में लगाए गए खीरे मार्च के अंत तक बाजार में आने लगते हैं। ग्वार की खेती खासकर हल्की रेतीली मिट्टी में कम खर्च में की जाती है। कई किसान इसे सहायक फसल के रूप में लेते हैं और सीजन में अच्छा रिटर्न निकालते हैं।
धनिया और साग से जल्दी नकद
धनिया अगर फरवरी के आखिरी दिनों में बोया जाए तो मार्च में अच्छे दाम दिलाता है। हरे धनिए की कमी उस समय रहती है जब गर्मी शुरू होती है। स्थानीय साग की किस्में भी इसी समय लगाई जाती हैं क्योंकि इनका बाजार पास के कस्बों और शहरों में तुरंत मिल जाता है।
सही किस्म का चुनाव क्यों फर्क डालता है
मैदान से जुड़े किसान बताते हैं कि एक ही सब्जी की अलग किस्मों में बाजार भाव का अंतर साफ दिखता है। व्यापारी उसी माल को प्राथमिकता देते हैं जो आकार रंग और तुड़ाई में एक जैसा हो। फरवरी की बुवाई में यही चयन पूरे सीजन का मुनाफा तय करता है।
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लेखक के बारे में
युवा और ऊर्जावान पत्रकार चयन प्रजापत 'रॉयल बुलेटिन' के लिए मध्य प्रदेश के इंदौर से रिपोर्टिंग कर रहे हैं। आपकी मुख्य विशेषज्ञता खेल (Sports), कृषि (Farming) और ऑटोमोबाइल (Automobile) सेक्टर में है। चयन प्रजापत इन विषयों की तकनीकी समझ के साथ-साथ ज़मीनी हकीकत को अपनी खबरों में पिरोने के लिए जाने जाते हैं। इंदौर और मालवा क्षेत्र की खबरों के साथ-साथ ऑटोमोबाइल और खेल जगत की विशेष कवरेज के लिए आप रॉयल बुलेटिन के एक महत्वपूर्ण स्तंभ हैं।

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