विप्र महासभा का ऐलान: घूसखोर पंडित के डायरेक्टर को जूते मारने वाले को दिया जाएगा एक लाख रुपये का इनाम
जयपुर। विप्र महासभा ने घूसखोर पंडित फिल्म का विरोध करते हुए फिल्म के डायरेक्टर और अभिनेता के खिलाफ ऐलान करते हुए उन्हे जूते मारने वाले को एक लाख रुपये इनाम की घोषणा की है।
विप्र महासभा के अध्यक्ष सुनील उदोईया ने घूसखोर पंडित फिल्म के डायरेक्टर और एक्टर को जूता मारने वाले को एक लाख देने का ऐलान किया है। महासभा ने डायरेक्टर और अभिनेता को जूते मारने वाले व्यक्ति को विप्र वीर सम्मान देने की घोषणा की है। इसके साथ ही एक लाख रुपये के इनाम का भी ऐलान किया गया है। विप्र महासभा के अध्यक्ष सुनील उदोईया ने बताया कि यह फैसला समाज के आत्मसम्मान और स्वाभिमान से जुड़ा हुआ है। फिल्म के नाम को लेकर समाज में भारी विरोध है।
ये भी पढ़ें CM योगी का सख्त निर्देश: भू-माफिया और दबंगों पर होगी कड़ी कार्रवाई, जमीन कब्जाने वाले न बचेंफिल्म का शीर्षक जातिगत भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला है। नेटफ्लिक्स पर आने वाली फिल्म 'घूसखोर पंडित' के शीर्षक को लेकर देश भर में विवाद लगातार गहराता जा रहा है। विवाद के शुरुआती चरण में उत्तर प्रदेश पुलिस ने लखनऊ के हजरतगंज थाना क्षेत्र में फिल्म के निर्देशक नीरज पांडे और उनकी टीम के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है।
इस मामले को लेकर अखिल भारतीय ब्राह्मण समाज सहित अन्य संगठनों ने कई शहरों में फिल्म से जुड़े लोगों के पुतले जलाए और फिल्म पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है। राजनीतिक स्तर पर भी इस मुद्दे पर बयानबाजी तेज हो गई है। उत्तर प्रदेश के उप-मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने फिल्म उद्योग पर भारतीय संस्कृति और विशेष रूप से ब्राह्मण समाज को निशाना बनाने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि ऐसी सामग्री समाज में विभाजन पैदा करती है, और इस पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
विवाद के बीच फ़िल्म के निर्देशक नीरज पांडे ने सफाई दी है। उन्होंने कहा कि फिल्म का शीर्षक एक काल्पनिक चरित्र से जुड़ा है, और इसका उद्देश्य किसी भी समुदाय, धर्म या जाति को अपमानित करना नहीं है। उन्होंने कहा कि फिल्म को उसके पूरे कथानक के संदर्भ में देखा जाना चाहिए, साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि प्रचार सामग्री को वापस लिया गया है, जिससे किसी की भावनाओं को ठेस न पहुंचे। बीएसपी प्रमुख मायावती ने भी इस विवाद पर प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने केंद्र सरकार से फिल्म पर प्रतिबंध लगाने की मांग करते हुए कहा कि यह मामला जातिगत भावनाओं को भड़काने वाला है, और ब्राह्मण समाज का अपमान करता है।
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लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

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