कम लागत में लाखों की कमाई, स्ट्रॉबेरी की खेती से बदली किसानों की किस्मत और खुला मुनाफे का नया रास्ता

हम खेती की उस नई राह की बात करने जा रहे हैं जिसने हजारों किसानों की किस्मत बदल दी है। पारंपरिक फसलों से हटकर अब किसान स्ट्रॉबेरी की खेती से अपनी आमदनी को कई गुना बढ़ा रहे हैं। कम लागत ज्यादा मुनाफा और रोजाना नकद आमदनी देने वाली यह फसल आज आर्थिक मजबूती का मजबूत सहारा बन चुकी है।

खेती में बदलाव और नई सोच का असर

आज का किसान सिर्फ परंपरा पर नहीं बल्कि बाजार की मांग पर भी ध्यान दे रहा है। सर्दियों में जब स्ट्रॉबेरी की मांग तेजी से बढ़ती है तब यही फसल किसानों के लिए सोने की खान बन जाती है। बेहतर बाजार सरकारी सहायता और नई तकनीक ने इस खेती को बेहद फायदेमंद बना दिया है।

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स्ट्रॉबेरी क्यों बनी मुनाफे की फसल

स्ट्रॉबेरी स्वाद में बेहतरीन होने के साथ सेहत के लिए भी बहुत फायदेमंद मानी जाती है। यही वजह है कि होटल मिठाई की दुकान और शहरों के बाजारों में इसकी मांग लगातार बनी रहती है। जब मांग ज्यादा होती है तो भाव भी अच्छा मिलता है और किसान को सीधा फायदा होता है।

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सही समय और सही तरीका बनाता है खेती को सफल

स्ट्रॉबेरी के पौधे अक्टूबर महीने में लगाए जाते हैं और मार्च तक लगातार फल मिलते रहते हैं। एक बार पौधा जम गया तो रोजाना तुड़ाई होती है और हर दिन आमदनी मिलती रहती है। यही इसकी सबसे बड़ी खासियत मानी जाती है।

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लागत कम और आमदनी कई गुना ज्यादा

अगर एक एकड़ में स्ट्रॉबेरी की खेती की जाए तो इसमें करीब दो से तीन लाख रुपए तक का खर्च आता है। वहीं सही देखभाल और अच्छे बाजार के साथ यही खेती दस से पंद्रह लाख रुपए तक की आमदनी दे सकती है। कम समय में इतना बड़ा मुनाफा बहुत कम फसलों में देखने को मिलता है।

रोजाना आमदनी से मजबूत होती है आर्थिक स्थिति

इस खेती की सबसे बड़ी ताकत यह है कि इसमें रोजाना फल तोड़े जाते हैं और रोज पैसा मिलता रहता है। इससे किसान को नकद पैसों की कमी नहीं होती और खेती के साथ घर का खर्च भी आसानी से चलता रहता है।

मिट्टी और तकनीक से तय होती है सफलता

स्ट्रॉबेरी की खेती के लिए भुरभुरी और उपजाऊ मिट्टी सबसे उपयुक्त मानी जाती है। मिट्टी का पीएच मान पांच दशमलव तीन से छह के बीच होना चाहिए। खेत में जैविक खाद की पर्याप्त मात्रा जरूरी होती है। पच्चीस से तीस सेंटीमीटर ऊंची क्यारियां बनाकर मल्चिंग तकनीक का उपयोग किया जाता है जिससे नमी बनी रहती है और खरपतवार कम उगते हैं।

नई फसल से नई उम्मीद

स्ट्रॉबेरी की खेती ने यह साबित कर दिया है कि अगर किसान नई सोच और सही जानकारी के साथ आगे बढ़े तो खेती घाटे का नहीं बल्कि मुनाफे का सौदा बन सकती है। यह फसल आज आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ता हुआ एक मजबूत कदम बन चुकी है।

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चयन प्रजापत | खेल, कृषि, ऑटोमोबाइल रिपोर्टर Picture

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