ईरान-इजराइल महायुद्ध: ऑयल डिपो पर हमलों के बाद 'ब्लैक रेन' का खतरा, WHO ने जारी की रेड अलर्ट चेतावनी
अमेरिका का 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' तेज, इजराइल के हमलों में ईरान की ऐतिहासिक विरासतें भी खाक; तेहरान का सरेंडर से इनकार
तेहरान/वॉशिंगटन/यरूशलम। पश्चिम एशिया में जारी भीषण संघर्ष अब विनाशकारी मोड़ पर पहुंच गया है। ईरान के तेल ठिकानों (ऑयल डिपो) पर हुए भीषण हमलों के बाद आसमान में जहरीले धुएं का साम्राज्य है, जिसे देखते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने 'ब्लैक रेन' (जहरीली बारिश) की चेतावनी जारी की है। दूसरी ओर, अमेरिकी सेना ने 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' के तहत ईरान के मिसाइल ढांचे और नौसेना को भारी नुकसान पहुंचाया है।
'ब्लैक रेन' से कैंसर और सांस का खतरा
WHO के मुताबिक, तेल डिपो में लगी आग से हवा में टॉक्सिक हाइड्रोकार्बन, सल्फर ऑक्साइड और नाइट्रोजन के खतरनाक कण घुल गए हैं। इसके कारण होने वाली 'ब्लैक रेन' त्वचा, आंखों और फेफड़ों को गंभीर नुकसान पहुंचा सकती है। लंबे समय तक इसके संपर्क में रहने से कैंसर जैसी घातक बीमारियां हो सकती हैं। संगठन ने ईरानी नागरिकों को घरों के भीतर रहने और मास्क का उपयोग करने की सलाह दी है।
अमेरिकी ऑपरेशन 'एपिक फ्यूरी' और नेतन्याहू की हुंकार
व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लीविट ने खुलासा किया कि अमेरिकी सेना ईरान की मिसाइल क्षमताओं को जड़ से मिटाने के लिए अभियान चला रही है। अब तक ईरान के 50 से अधिक नौसैनिक जहाज और एक बड़ा ड्रोन कैरियर नष्ट किया जा चुका है। इधर, इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने स्पष्ट कर दिया है कि उनका सैन्य अभियान 'अभी खत्म नहीं' हुआ है। उन्होंने ईरानी जनता से वहां की 'तानाशाही' को उखाड़ फेंकने का आह्वान किया है।
ऐतिहासिक विरासतों पर बरसे बम: 'चहेल सोतून पैलेस' क्षतिग्रस्त
युद्ध की आग में ईरान की सदियों पुरानी संस्कृति भी स्वाहा हो रही है। इजरायली हवाई हमलों में इस्फ़ाहान के प्रसिद्ध 'चहेल सोतून पैलेस' समेत यूनेस्को की सूची में शामिल कई ऐतिहासिक मस्जिदों और महलों को भारी नुकसान पहुंचा है। 17वीं शताब्दी के भित्ति चित्रों और वास्तुकला के लिए मशहूर यह महल अब खंडहर में तब्दील होने की कगार पर है।
ईरान का अड़ियल रुख: "युद्धविराम नहीं, सबक सिखाएंगे"
भारी नुकसान के बावजूद ईरान झुकने को तैयार नहीं है। ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बगेर ग़ालिबफ़ और सरकारी प्रवक्ता फ़ातिमा मोहजेरानी ने स्पष्ट किया है कि तेहरान युद्धविराम की मांग नहीं करेगा। उनका कहना है कि जब तक हमलावर को निर्णायक अंत तक नहीं पहुंचाया जाता, तब तक मिसाइल अभियान जारी रहेगा। विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने भी अमेरिका से किसी भी तरह की बातचीत की संभावना को सिरे से खारिज कर दिया है।
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