आम बजट से किसानों पर बढ़ेगा कर्ज, कंपनियों को होगा फायदा, ट्रैक्टर 3 पीढ़ी चलता है- राकेश टिकैत
मुजफ्फरनगर। महावीर चौक स्थित राजकीय इंटर कॉलेज के मैदान में आज धरने का पांचवा दिन था। किसान सरकार के द्वारा पेश होने वाले बजट से आस लगाये हुए थे कि कुछ न कुछ ऐसा होगा जो किसान हितों के लिए लाभदायी साबित होगा, लेकिन किसान के हाथ कुछ नहीं आया। अमृत काल का यह बजट […]
मुजफ्फरनगर। महावीर चौक स्थित राजकीय इंटर कॉलेज के मैदान में आज धरने का पांचवा दिन था। किसान सरकार के द्वारा पेश होने वाले बजट से आस लगाये हुए थे कि कुछ न कुछ ऐसा होगा जो किसान हितों के लिए लाभदायी साबित होगा, लेकिन किसान के हाथ कुछ नहीं आया।
अमृत काल का यह बजट किसानों को ऋणकाल से अंधकारकाल में ले जाने वाला है। सरकार ने अपने बजट पर पूर्व में भी कई वायदे किसानों के साथ किए हैं, लेकिन योजना को लाने के बाद धरातल पर कोई भी लाभ किसानों को नहीं पहुंचा है।
ये भी पढ़ें मुज़फ्फरनगर में सड़क सुरक्षा-जीवन रक्षा: एनएसएस स्वयंसेवकों ने बुलंद की आवाज, एआरटीओ ने दिलाई शपथसरकार ने अपने बजट में कहा कि वह किसानों को 20 लाख करोड़ तक क्रेडिट कार्ड के जरिए ऋण बांटने का लक्ष्य पूरा करेगी, लेकिन इसमें किसानों को कोई फायदा होने वाला नहीं है। किसान की भूमि बैंक में बंधक हो जाएगी और आने वाले सालों में उसे अधिग्रहण कर सरकार व बैंक दिया हुआ कर्ज जमीन के माध्यम से वसूल लेंगे।
सरकार किसानों को कर्ज नहीं फसलों के भाव व गारंटी कानून देने का काम करें। आज बजट में किसान दूर-दूर तक भी नजर नहीं आया, दिखायी दे रहे थे तो सिर्फ सरकार के द्वारा पेश किए जा रहे आंकड़ें।
भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा कि कुछ रिपोर्टिंग एजेन्सियों ने अपने द्वारा किए गए सर्वे में कहा है कि अगर सरकार कृषि क्षेत्र में लगभग 270 अरब डॉलर का निवेश करे तो 2031 तक 800 अरब डॉलर सरकार को राजस्व के रूप में प्राप्त होगा। देश वैश्विक खाद्यान्न संकट के दौर से गुजर रहा है। सरकार के आंकड़े और धरातल के आंकड़ों में जमीन आसमान का अन्तर है।
उन्होंने कहा कि अगर सरकार किसानों को फसलों की गारंटी कानून व वाजिब भाव दे तो देश का अन्नदाता उत्पादन करके चल रहे खाद्यान्न संकट को दूर कर सकता है। उन्होंने कहा कि देश के अन्दर घटता हुआ कृषि क्षेत्रफल और उत्पादन किसान के सामने चट्टान की तरह खड़ा हैं, जिसका अनुभव पूर्व में गेंहू के उत्पादन व क्षेत्रफल में 2021-22 के सत्र में देश देख चुका है। इसका कटु अनुभव व जानकारी सरकार को भी है। सरकार कृषि यंत्रों से जीएसटी हटाकर किसानों को कुछ राहत पहुंचा सकती थी, लेकिन वो भी नहीं हुआ। आने वाले समय में सरकार अगर किसान की ओर नहीं देखेगी, तो परिणाम और अधिक भयावह होंगें। भारतीय किसान यूनियन आज आए बजट को सिरे से नकारती है, क्योंकि यह बजट सिर्फ आंकड़ों का बजट है।
एक ट्रैक्टर तीन पीढ़ी चलता है, न कि 10 या 15 साल
राकेश टिकैत ने केंद्र व प्रदेश सरकार को सवालों के घेरे में लेते हुए जमकर तंज कसा है। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा किसानों के 15 साल पुराने ट्रैक्टर को कटवाने के लिए कहा गया है। सरकार द्वारा लिए गए निर्णय का भारतीय किसान यूनियन पुरजोर विरोध करती है। उन्होंने कहा कि एक खरीदा गया ट्रैक्टर तीन पीढ़ी चलता है, मगर पूंजीपतियों और व्यापारियों को फ़ायदा देने के लिए देश व प्रदेश की जनता के साथ सौतेला व्यवहार किया जा रहा है। भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता का कहना है कि किसानों की आमदनी घटाते हुए तेल, खाद, बिजली बिल आदि के रेट दोगुना कर दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश एवं देश भर में किसान अपने हक के लिए निरंतर धरना प्रदर्शन कर रहा है, मगर भाजपा की गूंगी बहरी सरकार को कुछ भी दिखाई एवं सुनाई नहीं दे रहा है।
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लेखक के बारे में
रॉयल बुलेटिन के संस्थापक एवं मुख्य संपादक अनिल रॉयल ने वर्ष 1985 में मात्र 17 वर्ष की आयु से मुज़फ्फरनगर की पावन भूमि से निर्भीक और जनपक्षधर पत्रकारिता का संकल्प लिया। बीते लगभग चार दशकों से वे पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सशक्त और विश्वसनीय आवाज़ के रूप में पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं।
पत्रकारिता के अपने लंबे अनुभव के आधार पर उन्होंने वर्ष 2010 में नोएडा से रॉयल बुलेटिन के प्रिंट संस्करण का सफल विस्तार किया। समय के साथ बदलते मीडिया परिदृश्य को समझते हुए, उनके नेतृत्व में यह संस्थान आज एक मजबूत और प्रभावशाली डिजिटल समाचार मंच के रूप में स्थापित हो चुका है।
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