भारत-जापान की अटूट दोस्ती: मजबूत सुरक्षा और टेक्नोलॉजी को बढ़ावा देने से जापान-भारत संबंधों को मिली नई गति
नई दिल्ली। एक रिपोर्ट के अनुसार, जापान और भारत के बीच लंबे समय से चले आ रहे मजबूत रिश्ते अब एक नए और गतिशील दौर में प्रवेश कर रहे हैं। इन संबंधों में अब सुरक्षा सहयोग और उन्नत तकनीकों में साझेदारी पर ज्यादा जोर दिया जा रहा है। जापान फॉरवर्ड की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि दोनों देशों के बीच वर्षों से मजबूत होते आ रहे द्विपक्षीय संबंधों को अब इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में साझा रणनीतिक हितों और लोगों के बीच बढ़ते संपर्क से नई ऊर्जा मिल रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, सांस्कृतिक आदान-प्रदान, भारत में जापानी निवेश में बढ़ोतरी और नवाचार व मैन्युफैक्चरिंग में सहयोग से रिश्तों को नई गति मिली है। दोनों देश वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच एक स्वतंत्र, खुला और नियम-आधारित इंडो-पैसिफिक क्षेत्र सुनिश्चित करने की समान दृष्टिकोण रखते हैं। अगस्त 2025 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जापान यात्रा के दौरान, उस समय के जापानी प्रधानमंत्री शिगेरु इशिबा ने पिछले दशक में द्विपक्षीय संबंधों में हुई उल्लेखनीय प्रगति की सराहना की और सुरक्षा सहयोग को और मजबूत करने पर जोर दिया।
ये भी पढ़ें मुजफ्फरनगर में टीईटी का दानव एक और जिंदगी लील गया, सहायक अध्यापक का ब्रेन हैमरेज से दुखद निधनउन्होंने कहा, "जापान और भारत, जो समान मूल्यों को साझा करते हैं, इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में कानून के शासन पर आधारित एक स्वतंत्र और खुले अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को बनाए रखने और मजबूत करने की जिम्मेदारी साझा करते हैं।" उन्होंने यह भी कहा कि अंतरराष्ट्रीय हालात अनिश्चित होते जा रहे हैं, ऐसे में दोनों देशों को क्षेत्र में शांति और स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए मिलकर काम करना चाहिए। दोनों पक्षों ने 'स्पेशल स्ट्रैटेजिक एंड ग्लोबल पार्टनरशिप' को और ऊंचाई देने की प्रतिबद्धता दोहराई। जापान के विदेश मंत्रालय ने कहा कि दोनों नेता एक-दूसरे की ताकत का उपयोग करते हुए भविष्य में पूरक संबंध विकसित करेंगे और आने वाली पीढ़ियों की चुनौतियों का समाधान करने के लिए सामाजिक और आर्थिक मूल्यों का निर्माण करेंगे। दिसंबर 2025 में प्रधानमंत्री मोदी ने मौजूदा जापानी प्रधानमंत्री साने ताकाइची से मुलाकात की, जहां दोनों नेताओं ने भारत-जापान विशेष रणनीतिक साझेदारी को और आगे बढ़ाने पर सहमति जताई। जापान-भारत मानव संसाधन आदान-प्रदान और सहयोग एक्शन प्लान के तहत दोनों देशों ने अगले पांच वर्षों में 5 लाख लोगों के दोतरफा आदान-प्रदान का लक्ष्य रखा है। इससे सांस्कृतिक, शैक्षणिक, आर्थिक और सुरक्षा संबंधों को मजबूती मिलेगी। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, "हमने आने वाले वर्षों के लिए एक रोडमैप तैयार किया है, जिसमें निवेश, नवाचार, पर्यावरण, तकनीक, स्वास्थ्य, मोबिलिटी, लोगों के बीच संपर्क और राज्य-प्रांत साझेदारी जैसे क्षेत्रों पर ध्यान दिया जाएगा।"
हाल के घटनाक्रम इन प्रतिबद्धताओं को जमीनी स्तर पर दर्शाते हैं। भारत में जापान नेशनल टूरिज्म ऑर्गेनाइजेशन द्वारा आयोजित 'जापान ट्रैवल फेयर 2026' का उद्देश्य सांस्कृतिक और पर्यटन संबंधों को मजबूत करना है। एक प्रतीकात्मक कदम के रूप में, जापान के विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोतेगी ने जापान-भारत स्ट्रैटेजिक डायलॉग के दौरान भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर को जापान की राष्ट्रीय क्रिकेट टीम की जर्सी भेंट की। नई दिल्ली स्थित जापानी दूतावास के मंत्री नोरियाकी आबे ने कहा कि क्रिकेट, जो भारत के सामाजिक जीवन का अहम हिस्सा है, अब दोनों देशों के बीच एक मजबूत सेतु बनकर उभर रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2023-24 में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार 21 अरब डॉलर था, जो 2026 में बढ़कर 25.17 अरब डॉलर हो गया। पिछले 25 वर्षों में जापान भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) का प्रमुख स्रोत रहा है और इस दौरान लगभग 43 अरब डॉलर का निवेश किया गया है। रिपोर्ट के निष्कर्ष में कहा गया है कि जापान-भारत संबंध पारंपरिक कूटनीति से आगे बढ़कर अब सुरक्षा, तकनीक और साझा लोकतांत्रिक मूल्यों पर आधारित एक व्यापक साझेदारी के रूप में विकसित हो रहे हैं।
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लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

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