अवैध वॉकी-टॉकी बेचने के लिए मेटा, अमेजन, फ्लिपकार्ट, मीशो पर लगा 10-10 लाख रुपये का जुर्माना
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने देश में दिग्गज ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स की जवाबदेही तय करने के लिए सख्त रुख अपनाया है। केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (सीसीपीए) ने अमेजन-फ्लिपकार्ट समेत 8 ई-कॉमर्स कंपनियों पर 10-10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है।
प्राधिकरण ने अनधिकृत वॉकी-टॉकी की लिस्टिंग और बिक्री के लिए अमेजन, फ्लिपकार्ट, मेटा (फेसबुक मार्केटप्लेस) और मीशो सहित आठ संस्थाओं पर कुल 44 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। मीशो, मेटा प्लेटफॉर्म्स (फेसबुक मार्केटप्लेस), फ्लिपकार्ट, और अमेजन पर 10-10 लाख रुपये और चिमिया, जियो मार्ट, टॉक प्रो और मास्कमैन टॉय पर 1-1 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है। रिपोर्ट के अनुसार मीशो, मेटा, चिमिया, जियोमार्ट और टॉक प्रो ने अपने जुर्माने का भुगतान कर दिया है, जबकि शेष प्लेटफॉर्म्स से भुगतान का इंतजार है।
सीसीपीए ने उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 और दूरसंचार कानूनों का उल्लंघन करते हुए अनधिकृत वॉकी-टॉकी को सूचीबद्ध करने और बेचने वाले ई-कॉमर्स मंचों के खिलाफ स्वतः संज्ञान लेते हुए यह कार्रवाई शुरू की है। प्राधिकरण ने विभिन्न मंचों पर 16,970 से अधिक गैर-अनुपालन वाले उत्पाद के सूचीबद्ध किए जाने की पहचान के बाद 13 ई-कॉमर्स मंचों चिमिया, जियोमार्ट, टॉक प्रो, मीशो, मास्कमैन टॉयज, ट्रेडइंडिया, अंतरिक्ष टेक्नोलॉजीज, वरदानमार्ट, इंडियामार्ट, मेटा प्लेटफॉर्म्स इंक (फेसबुक मार्केटप्लेस), फ्लिपकार्ट, कृष्णा मार्ट और अमेजन को नोटिस जारी किए हैं।
सीसीपीए की जांच में यह सामने आया कि ये प्लेटफॉर्म्स ऐसे पर्सनल मोबाइल रेडियो (पीएमआर) की बिक्री की सुविधा दे रहे थे, जो लाइसेंस-मुक्त फ्रीक्वेंसी बैंड (446.0-446.2 MHz) के बाहर काम कर रहे थे। नियमों के अनुसार ऐसे उपकरणों की बिक्री या संचालन से पहले 'उपकरण प्रकार अनुमोदन' (ईटीए) सर्टिफिकेशन लेना अनिवार्य है। इन प्लेटफॉर्म्स पर ऐसे वॉकी-टॉकी बेचे जा रहे थे, जिनके पास जरूरी लाइसेंस या तकनीकी मंजूरी नहीं थी।
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लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

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