मोहित चौहान बर्थडे: अभिनेता बनने का था सपना, लेकिन आवाज ने बना दिया स्टार
मुंबई। बॉलीवुड में मोहित चौहान अपने रोमांटिक गानों के लिए जाने जाते है। उनकी आवाज ने लाखों लोगों का दिल जीता। 'तुम से ही', 'पी लूं', 'तुम हो' जैसे गाने आज भी लोगों की पसंदीदा धुनों में शामिल हैं, लेकिन बहुत कम लोग ही जानते हैं कि मोहित चौहान का बचपन का सपना गायक बनने का नहीं, बल्कि अभिनेता बनने का था। उन्होंने एक इंटरव्यू में बताया था कि वह अभिनय की दुनिया में कदम रखना चाहते थे और इसके लिए उन्होंने थिएटर किया और राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (एनएसडी) में दाखिला लेने की कोशिश भी की थी। मोहित चौहान का जन्म 11 मार्च 1966 को हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले के नाहन में हुआ।
उनके पिता की सरकारी नौकरी थी, जिसके कारण परिवार को अक्सर अलग-अलग शहरों में ट्रांसफर होना पड़ता था। बचपन से ही उनका लगाव संगीत और अभिनय दोनों से था। उन्होंने अपने भाई के साथ गायन का अभ्यास किया और अपने दादा से प्रेरणा ली, जो शास्त्रीय गायक थे और हारमोनियम बजाते थे। उनकी संगीत यात्रा सिल्क रूट बैंड से शुरू हुई। मोहित चौहान और उनके साथी केम त्रिवेदी, अतुल मित्तल और केनी पुरी ने मिलकर इस बैंड की स्थापना की। मोहित बैंड में मुख्य गायक थे। उनके पहले एलबम 'बूंदें' में 'डूबा डूबा' और 'पहचान' जैसे गीत शामिल थे, जो युवाओं के बीच काफी लोकप्रिय हुए। बॉलीवुड में मोहित का सफर 2002 में फिल्म 'रोड' के गाने 'पहले नजर में डरी थी' से शुरू हुआ। इसके बाद उन्होंने कई फिल्मों में अपनी आवाज दी, लेकिन उन्हें पहचान 'रंग दे बसंती' के 'खून चला' और 'जब वी मेट' के 'तुम से ही' से मिली। मोहित ने अपने अभिनय के सपने को गाने के जरिए नई दिशा दी।
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उन्होंने कहा है कि गाने की भावनाओं में अभिनय करना भी उनके लिए एक तरीका रहा, जिससे उनका बचपन का सपना कहीं-न-कहीं पूरा हुआ। मोहित चौहान ने 'मसकली' (दिल्ली-6), 'साड्डा हक' (रॉकस्टार), 'जो भी मैं' (रॉकस्टार), और 'तुझे भुला दिया' (अंजाना अनजानी) जैसे कई हिट गाने दिए। उन्होंने हिंदी के अलावा बंगाली, कन्नड़, तमिल, पंजाबी और गुजराती जैसी भाषाओं में भी गाने गाए। उनके योगदान को कई पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है, जिनमें फिल्मफेयर, जी सिने अवार्ड और आईफा शामिल हैं।
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लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

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