एनसीआर में रफ्तार लगेंगे पंख: जेवर एयरपोर्ट और दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे को जोड़ने वाले कॉरिडोर को मिली हरी झंडी
केंद्रीय मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति ने मंजूर किए 3630.77 करोड़ रुपये
नई दिल्ली। केंद्रीय मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति ने आज बुनियादी ढांचे के विकास की दिशा में एक बड़ा निर्णय लिया है। सरकार ने उत्तर प्रदेश और हरियाणा के बीच दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे (दिल्ली-फरीदाबाद-बल्लभगढ़-सोहना उपमार्ग) से जेवर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे तक एक नए संपर्क मार्ग के निर्माण के लिए 3630.77 करोड़ रुपये के संशोधित परिव्यय को स्वीकृति दे दी है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति ने मंगलवार को उत्तर प्रदेश और हरियाणा में हाइब्रिड वार्षिकी आधार पर दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे के दिल्ली-फरीदाबाद-बल्लभगढ़-सोहना उपमार्ग से जेवर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे तक नए सड़क निर्माण के लिए 3630.77 करोड़ रुपये के संशोधित परिव्यय को स्वीकृति दे दी। यह परियोजना 'हाइब्रिड वार्षिकी आधार' पर विकसित की जाएगी। इसमें 31.42 किलोमीटर लंबा यह कॉरिडोर दक्षिण दिल्ली, फरीदाबाद और गुरुग्राम के यात्रियों के लिए जेवर हवाई अड्डे तक पहुँचने का सबसे तेज़ और सुगम रास्ता बनेगा। इससे न केवल समय की बचत होगी, बल्कि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियों और लॉजिस्टिक्स दक्षता को भी बड़ा बढ़ावा मिलेगा।
मल्टी-मोडल कनेक्टिविटी का केंद्र
यह कॉरिडोर रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे, यमुना एक्सप्रेसवे और डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर जैसे कई बड़े मार्गों को एक साथ जोड़ेगा। इनके जुड़ाव से बहुआयामी परिवहन संभव होगा, जिससे माल ढुलाई और शहरी आवागमन दोनों में क्रांतिकारी बदलाव आएगा।
एलिवेटेड कॉरिडोर के निर्माण: हरियाणा भी वहन करेगा अतिरिक्त खर्च
घनी आबादी वाले क्षेत्रों और भविष्य के बुनियादी ढांचे को ध्यान में रखते हुए, इस परियोजना का लगभग 11 किलोमीटर हिस्सा एलिवेटेड (ऊपरगामी) मार्ग के रूप में विकसित किया जाएगा। यह हिस्सा डीएनडी-बल्लभगढ़ बाईपास और जेवर एयरपोर्ट के बीच मुख्य कड़ी होगा। वहीं एलिवेटेड कॉरिडोर के निर्माण के कारण लागत में 689.24 करोड़ रुपये का अतिरिक्त इजाफा हुआ है। इस अतिरिक्त लागत से हरियाणा सरकार ने 450 करोड़ रुपये वहन करने पर अपनी सहमति जताई है। फरीदाबाद मास्टर प्लान-2031 के तहत घनी आबादी वाले क्षेत्रों से गुजरने वाला यह कॉरिडोर शहरी बुनियादी ढांचे के आधुनिकीकरण और क्षेत्रीय संपर्क का एक महत्वपूर्ण स्तंभ साबित होगा।
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लेखक के बारे में
ओ.पी. पाल पिछले साढ़े तीन दशकों से पत्रकारिता में सक्रिय एक प्रतिष्ठित नाम हैं। भारत सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त (P.I.B. Accredited) वरिष्ठ पत्रकार श्री पाल ने लंबे समय तक लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही के साथ-साथ गृह, रक्षा और कृषि जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालयों की नेशनल ब्यूरो स्तर पर रिपोर्टिंग की है।
अमर उजाला और दैनिक जागरण से पत्रकारिता की शुरुआत करने वाले श्री पाल ने 'शाह टाइम्स' में न्यूज़ एडिटर और 'हरिभूमि' (दिल्ली) में वरिष्ठ संवाददाता के रूप में लंबी सेवाएं दी हैं। राजनीति विज्ञान और कृषि के विशेषज्ञ होने के साथ-साथ वे 'साहित्य रत्न' से भी विभूषित हैं। वर्तमान में वे एक स्वतंत्र पत्रकार और स्तंभकार के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

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