गाजियाबाद: हाउस टैक्स की पुरानी दरों से जनता को मिली बड़ी राहत, महापौर सुनीता दयाल की लखनऊ में सफल वार्ता
लखनऊ / गाजियाबाद। गाजियाबाद के निवासियों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। शहर में पिछले कई दिनों से बढ़ रहे हाउस टैक्स को लेकर चल रही उहापोह की स्थिति पर अब विराम लग गया है। गाजियाबाद की महापौर सुनीता दयाल ने लखनऊ में शासन के उच्च अधिकारियों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की, जिसके बाद यह निर्णय लिया गया कि फिलहाल हाउस टैक्स की दरों में कोई बढ़ोतरी नहीं की जाएगी।
पुरानी दरों पर ही जमा होगा टैक्स
ये भी पढ़ें जाइडस की वाइस चेयरपर्सन मेहा पटेल ने महिलाओं से की अपील, 'दो हाथ, तीन मिनट और एक आसान परीक्षा'नगर निगम अब आगामी सत्र में भी पुरानी दरों के आधार पर ही हाउस टैक्स की वसूली करेगा। महापौर ने स्पष्ट किया कि बढ़े हुए हाउस टैक्स को लेकर जनता में भारी चिंता थी, जिसे देखते हुए उन्होंने लखनऊ का रुख किया। वहां उत्तर प्रदेश शासन के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ लंबी चर्चा के बाद यह तय हुआ कि जनहित को सर्वोपरि रखते हुए वर्तमान दरों को ही बरकरार रखा जाए। इस संबंध में आवश्यक कागजी प्रक्रिया और औपचारिकताएं अगले कुछ दिनों में पूरी कर ली जाएंगी।
ये भी पढ़ें आईडीबीआई बैंक में जूनियर असिस्टेंट मैनेजर के 1100 पदों पर बंपर वैकेंसी, 19 मार्च तक करें आवेदनजनहित के लिए महापौर का संघर्ष
बैठक के बाद महापौर सुनीता दयाल ने कहा, "मैं शुरू से ही जनता के हितों के लिए संघर्षशील रही हूँ और आज भी उनकी भावनाओं का सम्मान करना मेरी प्राथमिकता है। टैक्स न बढ़ाने का निर्णय सीधे तौर पर मध्यम वर्गीय परिवारों को आर्थिक बोझ से बचाएगा।" उन्होंने इस बड़ी राहत के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उत्तर प्रदेश सरकार और शासन का आभार व्यक्त किया है।
प्रमुख बिंदु:
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कोई बढ़ोतरी नहीं: गाजियाबाद नगर निगम हाउस टैक्स की दरों में फिलहाल कोई इजाफा नहीं करेगा।
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लखनऊ में बैठक: महापौर ने शासन के उच्चाधिकारियों के साथ गहन वार्ता कर गाजियाबाद के पक्ष को मजबूती से रखा।
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जल्द जारी होगा आदेश: बढ़ी हुई दरों के प्रस्ताव को रोकने की औपचारिक प्रक्रिया कुछ ही दिनों में पूर्ण हो जाएगी।
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जनता में खुशी: इस फैसले के बाद गाजियाबाद के रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (RWA) और आम नागरिकों ने राहत की सांस ली है।
महापौर की इस पहल ने साबित कर दिया है कि स्थानीय निकाय प्रशासन जनता की जेब पर अतिरिक्त भार डालने के बजाय समाधान निकालने की दिशा में कार्यरत है।
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