बेटे की इच्छामृत्यु पर पिता की भावुक अपील, सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा
नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने बेटे को इच्छामृत्यु देने के लिए पिता की अर्जी पर फैसला सुरक्षित रख लिया है। 31 वर्षीय बेटा पिछले 12 साल से अधिक समय से कोमा में है। जस्टिस जेबी पारदीवाला की अध्यक्षता वाली बेंच ने फैसला सुरक्षित रखने का आदेश दिया।
यह याचिका अशोक राणा ने दायर की है। 2013 में याचिकाकर्ता का बेटा हरीश राणा अपने पीजी हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिर गया था। गिरने के बाद से वो कोमा में है। हरीश राणा चंडीगढ़ में बीटेक कर रहा था। याचिका में कहा गया है कि एक मेडिकल बोर्ड बनाकर इसका पता लगाया जाए कि क्या जीवन रक्षक प्रणाली धीरे-धीरे हटायी जा सकती है।
इसके पहले याचिकाकर्ता ने दिल्ली उच्च न्यायालय का रुख किया था। उच्च न्यायालय ने याचिका खारिज कर दी थी। उच्चतम न्यायालय ने 2024 में याचिकाकर्ता को कोई भी राहत देने से इनकार करते हुए कहा था कि अगर आगे कोई दिशा-निर्देश की जरुरत हो, तो वो कोर्ट आ सकते हैं। 2024 के बाद याचिकाकर्ता के बेटे की स्थिति में कोई सुधार नहीं आया। तब याचिकाकर्ता ने दोबारा उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर हमें फॉलो करें और हमसे जुड़े रहें।
(Follow us on social media platforms and stay connected with us.)
Youtube – https://www.youtube.com/@RoyalBulletinIndia
Facebook – https://www.facebook.com/royalbulletin
https://www.instagram.com/royal.bulletin/
Twitter – https://twitter.com/royalbulletin
Whatsapp – https://chat.whatsapp.com/Haf4S3A5ZRlI6oGbKljJru
रॉयल बुलेटिन से जुड़ें:
देश-प्रदेश की ताज़ा ख़बरों को सबसे पहले पढ़ने के लिए हमारे सोशल मीडिया हैंडल को फॉलो करें:
आपको यह खबर कैसी लगी? अपनी राय नीचे कमेंट बॉक्स में ज़रूर दे। आपकी राय रॉयल बुलेटिन को और बेहतर बनाने में बहुत उपयोगी होगी।
संबंधित खबरें
लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

टिप्पणियां