आई-पैक रेड मामले में ममता सरकार को सुप्रीम कोर्ट का झटका, ED अफसरों पर FIR पर रोक
नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने आज आई-पैक (I-PAC) रेड मामले में एक बड़ा फैसला सुनाते हुए पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार को कड़ा झटका दिया है। न्यायालय ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) के अधिकारियों के खिलाफ दर्ज FIR पर रोक लगा दी है और राज्य सरकार को स्पष्ट चेतावनी दी है कि वे केंद्रीय एजेंसी के काम में बाधा न डालें।
जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस विपुल पंचोली की पीठ ने पश्चिम बंगाल पुलिस द्वारा ईडी अधिकारियों के खिलाफ दर्ज की गई FIR पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दी है।
कोर्ट ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, पश्चिम बंगाल सरकार और राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP) को नोटिस जारी कर दो हफ्ते के भीतर जवाब मांगा है। कोर्ट ने ED के आरोपों को 'बेहद गंभीर' बताया। पीठ ने कहा कि यदि केंद्रीय एजेंसियों की जांच में राज्य एजेंसियां इस तरह हस्तक्षेप करेंगी, तो देश में "अराजकता की स्थिति" (Lawlessness) पैदा हो जाएगी।
कोर्ट ने बंगाल सरकार को निर्देश दिया है कि 8 जनवरी की घटना से जुड़े I-PAC दफ्तर और आसपास के इलाकों के सभी CCTV फुटेज को सुरक्षित रखा जाए।
ये भी पढ़ें होलिका में ‘टैरिफ वार’ की थीम, प्रधानमंत्री मोदी का ‘पुष्पा’ अवतार बता दिया सशक्त भारत का संदेशयह मामला 8 जनवरी 2026 को कोलकाता में हुई घटना से जुड़ा है। ईडी ने कोयला तस्करी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में राजनीतिक सलाहकार फर्म I-PAC के दफ्तर और उसके प्रमुख प्रतीक जैन के आवास पर छापेमारी की थी। ईडी का आरोप है कि छापेमारी के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद मौके पर पहुँच गईं और उन्होंने जांच में बाधा डाली।
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सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट में दावा किया कि मुख्यमंत्री ने पुलिस की मदद से ईडी अधिकारियों के फोन छीन लिए और कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेज और डिजिटल डिवाइस अपने साथ ले गईं।
मामले की अगली सुनवाई 3 फरवरी 2026 को होगी। तब तक बंगाल पुलिस ED अधिकारियों के खिलाफ कोई भी दंडात्मक कार्रवाई नहीं कर सकेगी।
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लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

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