नसीरपुर कांड: 14 मार्च को होगा 'महा-धमाका'; ठाकुर पूरन सिंह बनाम कश्यप समाज, आमने-सामने की महापंचायत से दहला तितावी
मुजफ्फरनगर। जिले के तितावी क्षेत्र के नसीरपुर गांव से जुड़े विवाद ने अब एक बड़ा रूप अख्तियार कर लिया है। मंगलवार को कश्यप समाज की एक महत्वपूर्ण बैठक में घटना को लेकर गहरा रोष व्यक्त किया गया। समाज ने दो टूक शब्दों में प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि मामले में निष्पक्ष न्याय नहीं मिला, तो आगामी 14 मार्च को नसीरपुर में 36 बिरादरी की विशाल महापंचायत बुलाई जाएगी।
कश्यप समाज का कड़ा रुख: "अब न्याय की बारी"
नसीरपुर मामले को लेकर आयोजित विशेष बैठक में भारी संख्या में सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि और गणमान्य लोग शामिल हुए। वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि यह मुद्दा अब किसी एक वर्ग का नहीं, बल्कि सर्व समाज के सम्मान का विषय बन चुका है। बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि 14 मार्च को होने वाली महापंचायत में सभी वर्गों और बिरादरियों को आमंत्रित किया जाएगा ताकि एकजुट होकर ठोस रणनीति तय की जा सके। उल्लेखनीय है कि इससे पहले पूरन सिंह भी इस मुद्दे पर महापंचायत की चेतावनी दे चुके हैं, जिससे मामला और भी गरमा गया है।
विवाद की जड़: 6 मार्च की वो घटना
बता दें कि विवाद की शुरुआत तब हुई जब ठाकुर पूरन सिंह और कश्यप समाज के युवक दुष्यंत के बीच रास्ता खाली करने को लेकर कहासुनी हुई। आरोप है कि यह विवाद मारपीट में बदल गया, जिसमें दुष्यंत घायल हो गया। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए ठाकुर पूरन सिंह, उनके बेटों, भाई और ड्राइवर पर गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया और बेटों व भाई को जेल भेज दिया।
ये भी पढ़ें मुजफ्फरनगरः तितावी पुलिस पर फायरिंग करने वाला आरोपी मुठभेड़ में गिरफ्तार, तमंचा व कारतूस बरामदकश्यप समाज की हुंकार: "माफी नहीं तो समझौता नहीं"
गांव तिरपड़ी में आयोजित एक बड़ी पंचायत में कश्यप समाज ने दो-टूक ऐलान कर दिया है। समाज के वक्ताओं ने कहा कि यदि ठाकुर पूरन सिंह सार्वजनिक रूप से माफी नहीं मांगते, तो समझौता मुमकिन नहीं है। उन्होंने चुनौती दी है कि 14 मार्च को जिस दिन ठाकुर पूरन सिंह अपनी 'सम्मान बचाओ महापंचायत' करेंगे, उसी दिन कश्यप समाज भी नसीरपुर में भारी संख्या में जुटकर अपनी महापंचायत करेगा।
ठाकुर पूरन सिंह का पलटवार: "झुकूंगा नहीं, लड़ूंगा"
वहीं, किसान नेता ठाकुर पूरन सिंह ने माफी मांगने के सवाल पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि उनके बेटे और भाई पहले ही जेल जा चुके हैं, जो अपने आप में एक 'समझौता' है। उन्होंने पुलिस प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा:
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मेरी लड़ाई कश्यप परिवार से नहीं, बल्कि पुलिस की गलत नीतियों और पक्षपातपूर्ण जांच से है।
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गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर पुलिस किसानों की आवाज़ दबाना चाहती है।
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इस पूरे प्रकरण के पीछे कुछ सफेदपोश राजनेता अपनी रोटियां सेंक रहे हैं।
सांसद हरेंद्र मलिक की 'शांति पहल'
इधर, क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच मुजफ्फरनगर के सांसद हरेंद्र मलिक मंगलवार को सक्रिय नजर आए। उन्होंने तितावी क्षेत्र में दोनों पक्षों के परिवारों से मुलाकात की और पूरे मामले की जानकारी ली। सांसद ने दोनों परिवारों से शांति और आपसी भाईचारा बनाए रखने की पुरजोर अपील की।
हरेंद्र मलिक ने कहा, "समाज में सौहार्द बनाए रखना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। टकराव के बजाय संवाद ही हर समस्या का हल है।" सांसद की मौजूदगी में दोनों पक्षों ने भी धैर्य और आपसी सहमति से विवाद को सुलझाने पर सकारात्मक रुख दिखाया। इस दौरान राजेंद्र सिंह, चौधरी प्रदीप सिंह, रविंद्र प्रधान तितावी, रोहित चौधरी सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे।
प्रशासन के सामने खड़ी 'अग्निपरीक्षा'
14 मार्च को एक ही गांव और एक ही समय पर दो समाजों की महापंचायतें कानून-व्यवस्था के लिए एक बड़ा खतरा बन सकती हैं। पुलिस प्रशासन अब दोनों पक्षों के बीच मध्यस्थता कराने या सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतजाम करने की जुगत में लगा है।
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