करीब 51 प्रतिशत भारतीय कंपनियों के लिए साइबर अटैक सबसे बड़ा खतरा: रिपोर्ट
नई दिल्ली। करीब 51 प्रतिशत भारतीय कंपनियां मानती हैं कि साइबर सुरक्षा में सेंध (साइबर अटैक) उनकी कंपनी के प्रदर्शन के लिए सबसे बड़ा खतरा है। रविवार को जारी एफआईसीसीआई और ईवाई की 'रिस्क सर्वे' रिपोर्ट में यह बात कही गई है। इस रिपोर्ट के मुताबिक, 49 प्रतिशत कंपनियों ने कहा कि ग्राहकों की बदलती जरूरतें और उम्मीदें बड़ा जोखिम हैं, जबकि 48 प्रतिशत कंपनियों ने वैश्विक राजनीतिक घटनाओं (जैसे युद्ध या अंतरराष्ट्रीय तनाव) को बड़ा खतरा बताया।
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यह रिपोर्ट अलग-अलग सेक्टर के वरिष्ठ अधिकारियों की राय पर आधारित है। इसमें मूल्य निर्धारण, सप्लाई चेन, कर्मचारियों की रणनीति और तकनीकी निवेश को प्रभावित करने वाले कारकों पर प्रकाश डाला गया है, जिससे पता चलता है कि अब कंपनियों के लिए रिस्क मैनेजमेंट बहुत जरूरी हो गया है।
एफआईसीसीआई के कॉरपोरेट सिक्योरिटी और आपदा जोखिम कमेटी के चेयरमैन राजीव शर्मा ने कहा कि आज के अनिश्चित कारोबारी माहौल में जोखिम को पहले समझना, झेलना और उसके अनुसार खुद को बदलना लंबे समय तक आगे बढ़ने के लिए जरूरी है। अब कंपनियां जोखिम को कभी-कभार की समस्या नहीं मान रहीं, बल्कि इसे अपनी रणनीति और भविष्य की योजनाओं में शामिल कर रही हैं।
सर्वे में 61 प्रतिशत लोगों ने कहा कि तेज तकनीकी बदलाव और डिजिटल बदलाव उनकी प्रतिस्पर्धा को प्रभावित कर रहे हैं, जबकि इतने ही यानी 61 प्रतिशत लोगों का मानना है कि साइबर हमले और डेटा चोरी से कंपनियों को आर्थिक नुकसान और बदनामी दोनों हो सकती है।
रिपोर्ट के मुताबिक, 57 प्रतिशत कंपनियों को डेटा चोरी और कंपनी के अंदर से होने वाली धोखाधड़ी का डर है।47 प्रतिशत कंपनियों ने माना कि बढ़ते और जटिल होते साइबर खतरों से निपटना उनके लिए मुश्किल हो रहा है।आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) को लेकर भी दो तरह के खतरे सामने आ रहे हैं।
सर्वे में 60 प्रतिशत लोगों ने कहा कि अगर एआई जैसी नई तकनीकों को ठीक से नहीं अपनाया गया, तो कामकाज पर बुरा असर पड़ेगा। वहीं 54 प्रतिशत लोगों का मानना है कि एआई से जुड़े नैतिक और नियमों से जुड़े जोखिमों को सही तरीके से संभाला नहीं जा रहा है।
ईवाई इंडिया के रिस्क कंसल्टिंग लीडर सुधाकर राजेंद्रन ने कहा कि आज कंपनियां ऐसे दौर से गुजर रही हैं, जहां कई तरह के जोखिम एक साथ सामने आ रहे हैं, न कि अलग-अलग। उन्होंने बताया कि महंगाई, साइबर खतरे, एआई के नियम, जलवायु से जुड़ा जोखिम और सरकारी नियम-ये सभी मिलकर कंपनियों की मजबूती और प्रदर्शन को प्रभावित कर रहे हैं। इसलिए अब कंपनी के बोर्ड को ज्यादा सतर्क रहने, बेहतर जानकारी पर ध्यान देने और जोखिम से निपटने की रणनीति को मुख्य योजना में शामिल करने की जरूरत है।
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लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

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