भारतीय शेयर बाजार में बढ़ा डीआईआई का दबदबा, हिस्सेदारी 20 प्रतिशत के पार
मुंबई। भारतीय शेयर बाजार में घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) की हिस्सेदारी लगातार बढ़ रही है और यह अब 20 प्रतिशत से अधिक हो गई है। यह जानकारी सोमवार को जारी हुई एक रिपोर्ट में दी गई। मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड की ओर से जारी की गई रिपोर्ट में कहा गया कि 2025 की चौथी तिमाही में डीआईआई ने 23.4 अरब डॉलर का निवेश भारतीय शेयर बाजार में किया था। वहीं, 2025 में यह आंकड़ा 90.1 अरब डॉलर था। रिपोर्ट में आगे बताया गया कि डीआईआई की खरीदारी ने न केवल एफआईआई की बिकवाली को संभालने में मदद की है, जो कि 2025 में 18.8 अरब डॉलर थी, बल्कि आईपीओ और एफपीओ के माध्यम से कंपनियों की ओर से पिछले साल जुटाए गए 1.95 लाख करोड़ रुपए की राशि को भी फंड करने में मदद की है।
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रिपोर्ट के मुताबिक, 2021 के बाद से शेयर बाजार में डीआईआई की हिस्सेदारी लगातार बढ़ रही है और अब यह निफ्टी 500 में बढ़कर 20.6 प्रतिशत पर पहुंच गई है। वहीं, एफआईआई की हिस्सेदारी 18.4 प्रतिशत हो गई है।
बीते एक साल में निफ्टी 500 में डीआईआई की हिस्सेदारी में 2.10 प्रतिशत और तिमाही आधार पर 0.60 प्रतिशत का इजाफा हुआ है। एफआईआई की हिस्सेदारी में सालाना आधार पर 0.50 प्रतिशत की कमी और तिमाही आधार पर 0.10 प्रतिशत का इजाफा हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार, दिसंबर 2025 तिमाही तक डीआईआई के पास निफ्टी 50 की करीब 24.8 प्रतिशत हिस्सेदारी थी, जबकि विदेशी निवेशकों की हिस्सेदारी लगभग 24.3 प्रतिशत रही।
विश्लेषकों ने बताया कि एफआईआई की हिस्सेदारी पिछले आठ तिमाहियों में सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई है, जबकि घरेलू पूंजी निवेश में मजबूती आई है। उनका कहना है कि यह बदलाव अस्थायी नहीं, बल्कि संरचनात्मक है।
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, 2025 में 3.34 लाख करोड़ रुपए की एसआईपी निवेश राशि, पेंशन फंड की बढ़ती भागीदारी और नई एसेट मैनेजमेंट कंपनियों के आने से घरेलू निवेश तेजी से बढ़ा है।
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लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

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