राज्यसभा: भारत के रणनीतिक भंडारों में 3.37 मिलियन मीट्रिक टन से ज्यादा कच्चा तेल मौजूद : केंद्र

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने सोमवार को संसद को बताया कि देश के रणनीतिक भंडारों में 3.37 मिलियन मीट्रिक टन से ज्यादा कच्चा तेल मौजूद है, जो कि कुल स्टोरेज क्षमता का 64 प्रतिशत है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में कहा कि सरकार ने इंडियन स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व लिमिटेड (आईएसपीआरएल) नामक एक विशेष इकाई के माध्यम से आंध्र प्रदेश और कर्नाटक में तीन स्थानों पर 5.3 मिलियन मीट्रिक टन (एमएमटी) कच्चे तेल की कुल क्षमता वाली रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार (एसपीआर) सुविधाएं स्थापित की हैं, जो अल्पकालिक आपूर्ति संकटों के लिए बफर के रूप में कार्य कर सकती हैं।
ये भी पढ़ें पंजाब: मंत्री लालजीत सिंह भुल्लर का इस्तीफा, सरकारी अधिकारी की आत्महत्या के बाद CM मान का बड़ा एक्शनमंत्री ने बताया कि तटीय क्षेत्रों में स्थित इन भंडारों में उपलब्ध कच्चे तेल की सटीक मात्रा बाजार की स्थितियों के आधार पर बदलती रहती है। वास्तविक भंडार एक गतिशील संख्या है जो स्टॉक और वास्तविक खपत पर निर्भर करती है और ये दोनों ही स्थिर नहीं हैं। वर्तमान में, आईएसपीआरएल के पास लगभग 3.372 मिलियन मीट्रिक टन कच्चे तेल का भंडार उपलब्ध है, जो कुल भंडारण क्षमता का लगभग 64 प्रतिशत है। उन्होंने आगे बताया कि जुलाई 2021 में सरकार ने ओडिशा और कर्नाटक में कुल 6.5 मिलियन मीट्रिक टन भंडारण क्षमता वाली दो अतिरिक्त वाणिज्यिक-सह रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार सुविधाओं की स्थापना को भी मंजूरी दी थी।
मंत्री ने आगे कहा कि कच्चे तेल की आपूर्ति की सुरक्षा सुनिश्चित करने और किसी एक क्षेत्र से कच्चे तेल पर निर्भरता के जोखिम को कम करने के लिए, सार्वजनिक क्षेत्र के तेल और गैस उद्यम (पीएसई), जो बोर्ड द्वारा संचालित संस्थाएं हैं, अपनी तकनीकी और व्यावसायिक आवश्यकताओं के आधार पर विभिन्न स्रोतों से कच्चा तेल प्राप्त करते हैं।
वर्तमान में, ये पीएसई मध्य पूर्व के पारंपरिक आपूर्तिकर्ताओं जैसे इराक, सऊदी अरब, यूएई, कुवैत और कतर के अलावा, अमेरिका, नाइजीरिया, अंगोला, कनाडा, कोलंबिया, ब्राजील और मैक्सिको जैसे नए आपूर्तिकर्ताओं सहित 41 देशों से कच्चा तेल आयात करते हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य के बाधित होने के बाद, जिससे विश्व के 20 प्रतिशत तेल और गैस निर्यात का होता है, भारत ने मध्य पूर्व के अलावा अन्य स्रोतों से अपने तेल और गैस आयात में विविधता लाई है। अब देश के तेल आयात का लगभग 70 प्रतिशत खाड़ी देशों के बाहर के देशों से आ रहा है।
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लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

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