बॉम्बे हाई कोर्ट में समीर वानखेड़े केस की सुनवाई, कोर्ट ने 24 मार्च तक टाली सुनवाई
सुपरस्टार शाहरुख खान से रिश्वत मांगने का है आरोप

मुंबई। बॉम्बे हाई कोर्ट में सोमवार को नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) के अधिकारी समीर वानखेड़े से जुड़े एफआईआर क्वैशिंग (रद्द करने) के मामले पर सुनवाई हुई। यह मामला उस आरोप से जुड़ा है, जिसमें वानखेड़े पर सुपरस्टार शाहरुख खान से रिश्वत मांगने का आरोप लगाया गया है। सुनवाई के दौरान समीर वानखेड़े ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। उनका कहना है कि उन्होंने कॉर्डेलिया क्रूज ड्रग केस में शाहरुख खान या किसी से भी कोई रिश्वत नहीं मांगी। इसी केस में शाहरुख खान के बेटे आर्यन खान को गिरफ्तार किया गया था।
वानखेड़े की तरफ से वरिष्ठ वकील आबाद पोंडा ने कोर्ट में पक्ष रखा। उन्होंने चीफ जस्टिस चंद्रशेखर और जस्टिस सुमन श्याम की डिवीजन बेंच के सामने संक्षिप्त दलीलें पेश कीं। पोंडा ने कोर्ट को बताया कि उनके मुवक्किल ने न तो कभी किसी से पैसे की मांग की और न ही कोई रकम ली, जैसा कि सीबीआई ने अपनी एफआईआर में आरोप लगाया है।
उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार निरोधक कानून के तहत दर्ज इस मामले में अब तक कोई ठोस सबूत पेश नहीं किया गया है। सीबीआई की एफआईआर के मुताबिक, समीर वानखेड़े पर आरोप है कि उन्होंने शाहरुख खान से करीब 25 करोड़ रुपए की मांग की थी ताकि उनके बेटे आर्यन खान को क्लीन चिट दी जा सके। आज की सुनवाई में वानखेड़े के वकील ने कहा कि जांच एजेंसी यह साबित नहीं कर पाई है कि वानखेड़े का इस कथित लेन-देन से कोई संबंध है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर किसी निजी व्यक्ति ने पैसे लिए भी हैं, तो उसका वानखेड़े से कोई लेना-देना नहीं है। हालांकि, सुनवाई के दौरान जब आबाद पोंडा अपनी दलीलें दे रहे थे, तभी चीफ जस्टिस चंद्रशेखर ने मामले की सुनवाई को आगे बढ़ाते हुए कल, यानी 24 मार्च तक के लिए टाल दिया। अब इस मामले में आगे की सुनवाई 24 मार्च को होगी, जहां कोर्ट इस केस में अगली कार्रवाई तय कर सकता है।
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लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

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