गुरुग्राम: निवेश करके मुनाफा कमाने का प्रलोभन देकर ठगी के तीन आरोपी गिरफ्तार
-व्हाट्सएप ग्रुप व फर्जी ट्रेडिंग ऐप के माध्यम से मुनाफा का दिया था प्रलोभन
गुरुग्राम। वाट्सएप ग्रुप व फर्जी मोबाइल एप के माध्यम से स्टॉक ट्रेडिंग एवं आईपीओ में निवेश करके अधिक मुनाफा कमाने का प्रलोभन देकर ठगी के मामले में पुलिस को बड़ी सफलता हाथ लगी है। पुलिस ने इस मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस प्रवक्ता संदीप कुमार ने गुरुवार को बताया कि आरोपी चाइनीज बॉस के निर्देशों पर साइबर ठगी से बैंक खातों में ट्रांसफर कराई गई राशि को दूसरे बैंक खातों (लेयरिंग) में ट्रांसफर करने की वारदातों में अंजाम देने में आरोपी संलिप्त थे।
जानकारी के अनुसार 30 सितंबर 2025 को एक पीडि़त व्यक्ति द्वारा पुलिस थाना साइबर अपराध मानेसर जिला गुरुग्राम में एक लिखित शिकायत दी गई। जिसमें आरोप लगाया गया कि वाट्सएप ग्रुप व फर्जी मोबाइल ऐप के माध्यम से स्टॉक ट्रेडिंग एवं आईपीओ में निवेश करके अधिक मुनाफा कमाने का प्रलोभन देकर उसके साथ धोखाधड़ी की गई है। इस शिकायत पर पुलिस थाना साइबर अपराध मानेसर में केस दर्ज किया गया। थाना प्रबंधक निरीक्षक मनोज कुमार की टीम ने इस मामले की जांच करते हुए इस संगठित साइबर ठगी गिरोह का पर्दाफाश किया। इस अपराध में शामिल तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया। आरोपियों की पहचान विशाल निवासी गांव खोड़ा, जिला गाजियाबाद (उत्तर-प्रदेश), धर्मेंद्र निवासी गांव खोड़ा जिला गाजियाबाद (उत्तर-प्रदेश) व असलम निवासी गांव खिजरा, जिला हापुड़ (उत्तर-प्रदेश) के रूप में हुई। पुलिस टीम द्वारा आरोपी विशाल व धर्मेंद्र को गांव खोड़ा, गाजियाबाद से गिरफ्तार करके दो दिन के रिमांड पर लिया। आरोपी असलम को लक्ष्मी नगर, दिल्ली से गिरफ्तार करके दो दिन के पुलिस हिरासत रिमांड पर लिया गया।
पुलिस ने बरामद किए 22 मोबाइल व एक लैपटॉपपुलिस हिरासत रिमांड के दौरान पूछताछ में खुलासा हुआ कि इस केस में ठगी गई राशि में से तीन लाख रुपये एक रतिक अहमद नामक व्यक्ति के बैंक खाते में ट्रांसफर किए गए थे। रतिक के उस बैंक खाते में रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर का सिमकार्ड आरोपी विशाल रखता था। बाद में आरोपी विशाल ने यह सिमकार्ड अपने एक अन्य साथी को प्रयोग करने के लिए दे दिया था। आरोपी विशाल व धर्मेंद्र ने यह भी स्वीकार किया कि ये साइबर ठगी करने वाले आरोपी असलम के लिए कार्य करते थे और इन्हें प्रतिमाह 20 हजार रुपये वेतन के रूप में मिलते थे।
