पाकिस्तान: भारत के खिलाफ उगल रहे थे जहर, संसद में लगे 'गो जरदारी गो' और 'खान को रिहा करो' नारे
इस्लामाबाद। पाकिस्तान के हालात सामान्य नहीं हैं। देश के भीतर और बाहर चुनौतियां कम नहीं हैं। अफगानिस्तान से संघर्ष जारी है तो ईरान को लेकर उसका रुख साफ न होने से भी समस्याएं खड़ी हो रही हैं। यही वजह है कि सोमवार को जब देश के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी संसद को संबोधित करने पहुंचे तो उन्हें भारी विरोध का सामना करना पड़ा। वे अपनी असफलता का ठीकरा एक बार फिर भारत पर फोड़ रहे थे, गीदड़भभकी दे रहे थे, लेकिन उनके ही सांसदों ने बगलें झांकने पर मजबूर कर दिया। संयुक्त बैठक के दौरान उन्होंने कहा कि किसी भी घरेलू या विदेशी ताकत को अपनी शांति भंग करने के लिए पड़ोसी इलाके का इस्तेमाल करने की इजाजत नहीं दे सकते।” बतौर राष्ट्रपति जरदारी नौवीं बार नेशनल असेंबली के संयुक्त सत्र को संबोधित करने पहुंचे थे।
शांति का राग अलापते हुए राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने सोमवार को युद्ध को आखिरी रास्ता बताते हुए भारत को आंखें दिखाने की कोशिश की। अपनी झूठी तारीफ करते हुए आगे कहा कि पाकिस्तान ने पहले ही भारत और अफगानिस्तान दोनों को अपनी काबिलियत का बस एक छोटा सा हिस्सा ही दिखाया है। इसके साथ ही दंभ भरा। परमाणु शक्ति होने का एहसास कराते हुए गीदड़भभकी की। बोले, “पाकिस्तान एक जिम्मेदार परमाणु संपन्न देश है और उस जिम्मेदारी का वजन समझता है। साथ ही, हम एक ऐसा देश हैं जो जरूरत पड़ने पर अपना बचाव करना भी जानता है।” गौर करने वाली बात ये रही कि जरदारी अपनी भड़ास निकालते रहे और उधर विपक्ष उनके खिलाफ नारे लगाता रहा। 'गो जरदारी गो' और 'खान को रिहा करो' के नारे से संसद गूंजती रही।
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पीटीआई की अगुवाई में विपक्षी गठबंधन पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की रिहाई की मांग कर रहा था। उनके बोर्ड ऑफ पीस में सहभागिता को लेकर सवाल उठाते रहे। नारे लग रहे थे 'जाली पीस बोर्ड से बाहर निकलें।' दरअसल, पाकिस्तान की अवाम फिलिस्तीन को लेकर इजरायल के रवैए से नाराज रहती है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गाजा पीस को ध्यान में रख एक बोर्ड बनाया। दुनिया के कई देशों को शामिल होने का निमंत्रण दिया। इसमें इस्लामाबाद ऐसे देशों की लिस्ट में शामिल था जिसने बिना कुछ सवाल किए तुरंत हामी भर दी। अब विरोध उसी को लेकर जमकर हो रहा है।
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लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

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