'एसबीआई योनो' ऐप के नाम पर सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा फर्जी मैसेज, डाउनलोड नहीं करें एपीके फाइल

नई दिल्ली। एसबीआई योनो ऐप के नाम पर सोशल मीडिया पर फर्जी मैसेज वायरल हो रहा है, जिसमें एपीके फाइल डाउनलोड कर आधार अपटेड करने की बात कही गई है। पीआईबी फैक्ट चैक की ओर से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर की गई एक पोस्ट में बताया कि एसबीआई के नाम से सोशल मीडिया पर एक मैसेज वायरल हो रहा है जिसमें दावा किया गया है कि यूजर्स को अपना आधार अपडेट करने के लिए मैसेज के साथ आई एक एपीके फाइल डाउनलोड और इंस्टॉल करनी होगी। साथ ही कहा गया कि यदि आधार अपडेट नहीं किया जाता है, तो एसबीआई योनो ऐप ब्लॉक हो जाएगा।
ये भी पढ़ें एनसीईआरटी किताब विवाद: सरकार ने बनाई तीन सदस्यीय विशेषज्ञ समिति, सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई पूरीपीआईबी फैक्ट चैक ने बताया कि यह दावा पूरी तरह से फर्जी है। एसबीआई ने इस तरह का कोई आधिकारिक मैसेज जारी नहीं किया है। साथ ही, यूजर्स से इस तरह की एपीके फाइल डाउनलोड न करने का आग्रह किया और कहा कि कोई भी निजी जानकारी जैसे बैकिंग या आधार डिटेल्स इन फाइलों में दर्ज न करें। इसके अलावा, इस तरह का मैसेज मिलने पर उसे जरूरी कार्रवाई के लिए 'रिपोर्ट डॉट फिशिंग एटदरेट एसबीआई डॉट को डॉट इन' पर रिपोर्ट करने का आग्रह किया।
यह घटना बैंकिंग ग्राहकों को निशाना बनाने वाले फिशिंग हमलों के बढ़ते चलन को उजागर करती है, खासकर व्हाट्सएप जैसे मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के माध्यम से। बैंक हमेशा लोगों से ऐसे मैसेज से सतर्क रहने का आग्रह करते हैं क्योंकि इस तरह से जालसाज अकसर खाताधारक के डर का फायदा उठाकर संवेदनशील जानकारी हासिल कर लेते हैं और कई बार खाते से सारे पैसे निकाल लेते हैं। इसके अतिरिक्त, सरकारी एजेंसी ने डिजिटल बैंकिंग के बढ़ते चलन और योनो जैसे ऐप्स के व्यापक उपयोग के साथ, यूजर्स को अवांछित संदेशों के प्रति सतर्क रहने और केवल आधिकारिक चैनलों से सत्यापित अपडेट पर ही भरोसा करने की सलाह दी।
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लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

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