गाजियाबाद में बड़ा जासूसी नेटवर्क का खुलासा, देश विरोधी गतिविधियों में शामिल 3 और आरोपी गिरफ्तार

गाजियाबाद। गाजियाबाद से एक बेहद गंभीर और चिंताजनक मामला सामने आया है, जहां पुलिस ने देश विरोधी गतिविधियों और संवेदनशील सूचनाओं को विदेश भेजने वाले एक संगठित गिरोह का पर्दाफाश किया है। इस मामले में अब तक कई आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जबकि कुछ नाबालिगों को भी हिरासत में लिया गया है। पुलिस के अनुसार, थाना कौशाम्बी क्षेत्र में 14 मार्च को सूचना मिली थी कि भोवापुर इलाके में रहने वाले कुछ युवक संदिग्ध गतिविधियों में लिप्त हैं। ये लोग रेलवे स्टेशन, सुरक्षा बलों के ठिकानों और अन्य महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों के वीडियो और फोटो बनाकर विदेश में बैठे लोगों को भेजते थे। साथ ही, पैसों का लालच देकर अन्य युवाओं को भी इस काम में शामिल किया जा रहा था।
सूचना के आधार पर पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए मामला दर्ज किया और शुरुआती चरण में 5 पुरुष और 1 महिला को गिरफ्तार किया। उनके मोबाइल फोन की जांच में कई संवेदनशील स्थानों के वीडियो, फोटो और लोकेशन डाटा बरामद हुआ। मामले की गंभीरता को देखते हुए एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया गया। जांच के दौरान 17 मार्च से आरोपियों को पुलिस रिमांड पर लेकर पूछताछ की गई, जिसके आधार पर 20 मार्च को 9 और आरोपियों को गिरफ्तार किया गया, जिनमें 5 नाबालिग भी शामिल थे। इन नाबालिगों को बाद में किशोर न्याय गृह भेज दिया गया। ताजा कार्रवाई में 22 मार्च को मुख्य आरोपी नौशाद अली उर्फ लालू को गिरफ्तार किया गया। उसकी निशानदेही पर एक महिला आरोपी मीरा और एक नाबालिग को भी पकड़ा गया।
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पूछताछ में सामने आया कि यह पूरा नेटवर्क सीमापार बैठे हैंडलर्स के इशारे पर काम कर रहा था। गिरोह के प्रमुख सदस्यों में सुहैल मलिक, नौशाद अली और समीर उर्फ शूटर शामिल हैं, जिनमें से सुहैल मलिक को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है। पुलिस के मुताबिक, आरोपी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए जुड़े थे और उन्हें विशेष ऐप्स के माध्यम से फोटो-वीडियो भेजने की ट्रेनिंग दी गई थी। ये लोग खासतौर पर आर्थिक रूप से कमजोर और तकनीकी जानकारी रखने वाले युवाओं को निशाना बनाते थे, ताकि उनसे संवेदनशील स्थानों की रेकी कराई जा सके।
महिला आरोपी मीरा का काम हथियारों की तस्करी करना था और वह पहले भी दिल्ली पुलिस द्वारा गिरफ्तार की जा चुकी है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 3 मोबाइल फोन बरामद किए हैं। जांच में यह भी सामने आया है कि विदेशी हैंडलर आरोपियों को सौर ऊर्जा से चलने वाले सिम-आधारित सीसीटीवी कैमरे लगाने के निर्देश दे रहे थे, ताकि महत्वपूर्ण स्थानों की लगातार निगरानी की जा सके। फिलहाल, पुलिस इस पूरे नेटवर्क के अन्य सदस्यों और विदेशी कनेक्शन की गहन जांच कर रही है। यह मामला राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा होने के कारण एजेंसियां भी सतर्क हो गई हैं।
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लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

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