महिपालपुर में एलपीजी सिलेंडरों की अवैध जमाखोरी का भंडाफोड़, तीन आरोपी गिरफ्तार

नई दिल्ली। दक्षिण-पश्चिम दिल्ली की एएटीएस टीम ने महिपालपुर इलाके में चल रहे एलपीजी सिलेंडरों की अवैध जमाखोरी और कालाबाजारी के एक बड़े रैकेट का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने इस मामले में तीन आरोपियों, कृष्ण, दिनेश साहू और मिथिलेश को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, आवश्यक वस्तुओं के अवैध व्यापार के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत एएटीएस की एक विशेष टीम को महिपालपुर स्थित के-845 में एलपीजी सिलेंडरों की अवैध जमाखोरी की गुप्त सूचना मिली थी।
इस सूचना के आधार पर 21 मार्च को टीम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए मौके पर छापा मारा और तीनों आरोपियों को रंगेहाथों पकड़ लिया। छापेमारी के दौरान पुलिस ने 70 घरेलू और 4 कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर बरामद किए। इसके अलावा, एक इलेक्ट्रॉनिक तौल मशीन, दो हैंगिंग तौल मशीनें और गैस रिफिलिंग में इस्तेमाल होने वाला धातु का पाइप भी बरामद हुआ। मौके पर मौजूद आरोपी सिलेंडरों के भंडारण और व्यापार के लिए कोई वैध लाइसेंस या अनुमति पत्र पेश नहीं कर सके।
पूछताछ में आरोपियों ने खुलासा किया कि वे पिछले तीन वर्षों से अवैध रूप से एलपीजी सिलेंडरों की खरीद-फरोख्त कर रहे थे। वे सिलेंडरों को बिना बिल के स्थानीय लोगों को बेचते थे और अधिक मुनाफा कमाने के लिए भरे हुए सिलेंडरों से गैस निकालकर खाली सिलेंडरों में भरते थे। इस काम के लिए वे धातु के पाइपों का इस्तेमाल करते थे और सिलेंडरों के परिवहन के लिए टाटा ऐस गोल्ड गाड़ी का उपयोग करते थे।
गिरफ्तार किए गए तीनों आरोपी मूल रूप से बिहार के बांका जिले के निवासी हैं और पिछले 20-25 वर्षों से दिल्ली में रह रहे थे। पुलिस ने बताया कि आरोपियों ने महिपालपुर में एक जगह किराए पर लेकर इसे अवैध गैस गोदाम के रूप में इस्तेमाल कर रखा था। इस संबंध में थाना वसंत कुंज नॉर्थ में मामला दर्ज किया गया है। पुलिस मामले की आगे की जांच कर रही है। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों के बयान के आधार पर अन्य आरोपियों की तलाश की जा रही है, जिससे पता चल सके कि ये लोग कहां-कहां एलपीजी सप्लाई करते हैं।
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लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

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