दिल्ली दंगा मामला: कड़कड़डूमा कोर्ट ने सबूतों के अभाव में 4 आरोपियों को किया रिहा
नई दिल्ली। कड़कड़डूमा कोर्ट ने दिल्ली दंगों की साजिश रचने के मामले में उच्चतम न्यायालय से जमानत पा चुके चार आरोपितों को रिहा करने का आदेश दिया है। एडिशनल सेशंस जज समीर बाजपेयी ने गुलफिशा फातिमा, मीरान हैदर, शिफा उर रहमान और मोहम्मद सलीम खान को रिहा करने का आदेश दिया।
कोर्ट ने चारों आरोपितों का बेल बांड स्वीकार करने के बाद रिहा करने का आदेश दिया। बुधवार काे दिल्ली पुलिस ने चारों आरोपितों और उनके जमानतियों से संबंधित वेरिफिकेशन रिपोर्ट और दस्तावेज दाखिल किया था। उच्चतम न्यायालय ने जिन आरोपितों को जमानत दी थी उनमें से एक शादाब अहमद ने अभी तक बेल बांड नहीं भरा है।
चारों आरोपितों ने 6 जनवरी को कड़कड़डूमा कोर्ट में बेल बांड दाखिल किया था जिसके बाद कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को निर्देश दिया था कि वो चारों आरोपितों के जमानतियों का वेरिफिकेशन रिपोर्ट दाखिल करे। 5 जनवरी काे उच्चतम न्यायालय ने दिल्ली दंगों की साजिश रचने के मामले में पांच आरोपितों को जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया था। जस्टिस अरविंद कुमार की अध्यक्षता वाली पीठ ने इन आरोपितों पर जमानत की कड़ी शर्तें लगाई गई थीं। उच्चतम न्यायालय
ने कहा था कि आरोपित किसी रैली में हिस्सा नहीं ले सकते और पोस्टर नहीं बांट सकते हैं। इसके साथ ही उच्चतम न्यायालय ने दो लाख के निजी मुचलके के अलावा दो लाख का स्थानीय जमानती बेल बांड भरने का आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा था कि पांचों आरोपित बिना ट्रायल कोर्ट की अनुमति के दिल्ली के बाहर नहीं जा सकते हैं। पांचों आरोपितों को अपना पासपोर्ट ट्रायल कोर्ट में जमा करने का आदेश दिया है। अगर किसी आरोपित के पास पासपोर्ट नहीं है तो इस संबंधी हलफनामा दाखिल करेगा। उच्चतम न्यायालय ने सभी आरोपितों को सप्ताह में दो बार जांच अधिकारी के समक्ष पेश होने का आदेश दिया। कोर्ट ने जांच अधिकारी के समक्ष सोमवार और गुरुवार को पेश होने का आदेश दिया।
उच्चतम न्यायालय ने इस मामले के दो आरोपितों उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत देने से इनकार कर दिया। इस मामले के चार आरोपितों को पहले ही जमानत मिल चुकी है। जिन आरोपितों को पहले जमानत मिल चुकी है उनमें सफूरा जरगर, आसिफ इकबाल तान्हा, देवांगन कलीता और नताशा नरवाल शामिल हैं।
नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) काे लेकर फरवरी, 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए सांप्रदायिक दंगों में 53 लोग मारे गए थे और करीब 200 लोग घायल हो गए थे।
