ईरान इजराइल युद्ध से भारत के बासमती चावल कारोबार पर संकट मध्य प्रदेश का करोड़ों का माल बंदरगाहों पर फंसा
आज हम आपको मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम जिले से जुड़ी एक ऐसी खबर बता रहे हैं जिसने किसानों व्यापारियों और राइस मिल उद्योग से जुड़े हजारों लोगों की चिंता बढ़ा दी है। बासमती चावल के लिए पूरे देश में पहचान रखने वाला यह इलाका इस समय एक बड़े संकट से गुजर रहा है। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और युद्ध जैसे हालात का असर अब सीधे नर्मदापुरम के चावल कारोबार पर दिखाई देने लगा है। समुद्री मार्गों पर बढ़ते खतरे के कारण खाड़ी देशों में होने वाला चावल निर्यात अचानक रुक गया है। इसका परिणाम यह हुआ कि जिले से भेजा गया करोड़ों रुपये का चावल बंदरगाहों और समुद्र के रास्तों में फंस गया है।
निर्यात बंद होने से राइस मिल उद्योग पर बढ़ा आर्थिक दबाव
नर्मदापुरम जिले में पिछले लगभग छह दिनों से बासमती चावल का निर्यात पूरी तरह प्रभावित है। इस कारण जिले के राइस मिल संचालकों पर आर्थिक दबाव लगातार बढ़ रहा है। इटारसी और पिपरिया क्षेत्र की कई राइस मिलों का तैयार चावल बंदरगाहों तक पहुंच चुका था लेकिन अब वह आगे नहीं बढ़ पा रहा है। कुछ खेप समुद्र में जहाजों में रुकी हुई है और कई ट्रक बंदरगाहों पर खड़े हैं।
इस स्थिति के कारण मिलों में माल का उठाव रुक गया है और गोदाम तेजी से भरते जा रहे हैं। कारोबारियों का कहना है कि यदि जल्द ही निर्यात शुरू नहीं हुआ तो मिलों में नई प्रोसेसिंग भी रोकनी पड़ सकती है। इससे पूरे उद्योग के सामने बड़ी आर्थिक चुनौती खड़ी हो सकती है।
सामान्य दिनों में रोजाना हजारों टन चावल जाता था विदेश
नर्मदापुरम जिले का बासमती चावल खाड़ी देशों में बड़ी मात्रा में भेजा जाता है। सामान्य दिनों में सिर्फ इटारसी और आसपास के कारखानों से ही प्रतिदिन लगभग बीस से पच्चीस टन बासमती चावल गल्फ देशों के लिए रवाना किया जाता था।
पूरे जिले की बात करें तो रोजाना करीब बारह सौ टन चावल का निर्यात खाड़ी देशों में होता है। लेकिन समुद्री रास्तों पर युद्ध जैसे हालात बनने के कारण अचानक यह पूरा व्यापार रुक गया है। इससे स्थानीय उद्योग और व्यापारियों को भारी आर्थिक नुकसान होने की आशंका बढ़ गई है।
खाड़ी देशों में नर्मदापुरम के बासमती चावल की खास पहचान
मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम क्षेत्र का बासमती चावल अपनी खुशबू और गुणवत्ता के कारण विदेशों में काफी लोकप्रिय है। इराक जॉर्डन कुवैत और दुबई जैसे देशों में बड़े होटल और रेस्टोरेंट में इसी चावल का इस्तेमाल किया जाता है।
खाड़ी देशों में होने वाले शाही भोज और बिरयानी के लिए भी इसी क्षेत्र का बासमती चावल खास पसंद किया जाता है। यही कारण है कि जिले का लगभग साठ प्रतिशत चावल इन देशों में निर्यात होता है। लेकिन मौजूदा हालात में अधिकतर खेप समुद्री रास्तों और बंदरगाहों पर अटक गई है जिससे व्यापार पूरी तरह प्रभावित हो गया है।
व्यापारियों के साथ किसानों और मजदूरों की भी बढ़ी चिंता
इस संकट का असर सिर्फ व्यापारियों तक सीमित नहीं है बल्कि किसानों और मजदूरों पर भी इसका प्रभाव साफ दिखाई देने लगा है। नर्मदापुरम के चावल कारोबारी पंकज अग्रवाल के अनुसार जिले के निर्यातकों का करोड़ों रुपये का चावल बंदरगाहों और समुद्री मार्गों में फंसा हुआ है।
कई ट्रक जो पहले ही फैक्ट्रियों से बंदरगाहों की ओर भेजे जा चुके थे उन्हें वापस लौटना पड़ा है। गोदाम पहले से ही चावल से भरे हुए हैं और अब नई प्रोसेसिंग रोकनी पड़ रही है। इसका सीधा असर राइस मिलों में काम करने वाले मजदूरों के रोजगार पर पड़ रहा है।
इसके साथ ही मंडियों में धान के दाम भी धीरे धीरे गिरने लगे हैं जिससे किसानों की चिंता और बढ़ गई है।
लंबे समय तक हालात रहे तो उद्योग पर आ सकता है बड़ा संकट
कारोबारियों का मानना है कि यदि अगले दस से पंद्रह दिनों तक यही स्थिति बनी रही तो नर्मदापुरम का बासमती चावल उद्योग गंभीर संकट में फंस सकता है। बासमती सेला पंद्रह सौ नौ ग्यारह सौ इक्कीस सुगंधा और शरबती जैसी किस्मों की खाड़ी देशों में भारी मांग रहती है।
लेकिन युद्ध जैसे हालात के कारण इन किस्मों की बड़ी खेप समुद्र और बंदरगाहों में अटक गई है। इससे साफ दिखाई देता है कि हजारों किलोमीटर दूर चल रही जंग का असर अब मध्य प्रदेश के किसानों मजदूरों और व्यापारियों की आजीविका पर भी पड़ने लगा है।
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युवा और ऊर्जावान पत्रकार चयन प्रजापत 'रॉयल बुलेटिन' के लिए मध्य प्रदेश के इंदौर से रिपोर्टिंग कर रहे हैं। आपकी मुख्य विशेषज्ञता खेल (Sports), कृषि (Farming) और ऑटोमोबाइल (Automobile) सेक्टर में है। चयन प्रजापत इन विषयों की तकनीकी समझ के साथ-साथ ज़मीनी हकीकत को अपनी खबरों में पिरोने के लिए जाने जाते हैं। इंदौर और मालवा क्षेत्र की खबरों के साथ-साथ ऑटोमोबाइल और खेल जगत की विशेष कवरेज के लिए आप रॉयल बुलेटिन के एक महत्वपूर्ण स्तंभ हैं।

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