Mahakal Mandir Ujjain: महाकाल मंदिर में होलिका दहन और धुलेंडी पर विशेष भस्म आरती जानें 2 और 3 मार्च का पूरा धार्मिक कार्यक्रम
उज्जैन की पवित्र धरती एक बार फिर भक्ति और रंगों से सराबोर होने जा रही है। 2 मार्च को उज्जैन स्थित प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग Mahakaleshwar Temple में परंपरागत विधि विधान के साथ होलिका दहन किया जाएगा। हर साल की तरह इस बार भी श्रद्धालुओं में गहरा उत्साह देखने को मिल रहा है। मंदिर परिसर में होली का उत्सवी माहौल रहेगा और भगवान महाकाल के दरबार में आस्था के रंग बिखरेंगे।
संध्या आरती में गुलाल अर्पण और विधिवत होलिका दहन
मंदिर की प्राचीन परंपरा के अनुसार संध्या आरती के समय पुजारी भगवान महाकाल को गुलाल अर्पित करेंगे। आरती के दौरान पूरा परिसर भक्ति और उल्लास से भर जाएगा। जैसे ही आरती पूर्ण होगी उसके बाद विधिवत पूजन कर होलिका दहन संपन्न किया जाएगा। यह अनुष्ठान केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं बल्कि श्रद्धा और संस्कृति का जीवंत प्रतीक है।
हर वर्ष हजारों श्रद्धालु इस पावन अवसर पर महाकाल के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। मंदिर परिसर में भक्तिमय रंगों की छटा देखते ही बनती है और हर चेहरा आस्था के रंग में रंगा नजर आता है।
धुलेंडी पर भस्म आरती में रंगों की आध्यात्मिक छटा
3 मार्च की तड़के 4 बजे होने वाली प्रसिद्ध भस्म आरती में धुलेंडी के अवसर पर विशेष रंगोत्सव मनाया जाएगा। इस पावन बेला में पुजारी और पुरोहित भगवान महाकाल के साथ हर्बल गुलाल से होली खेलेंगे। यह अनूठी परंपरा आध्यात्मिक आस्था और सांस्कृतिक उल्लास का अद्भुत संगम प्रस्तुत करती है।
भोर की शांति में जब भस्म आरती होती है तब देशभर से आए श्रद्धालु भावविभोर हो जाते हैं। महाकाल के दरबार में यह दृश्य किसी दिव्य अनुभव से कम नहीं होता। धुलेंडी पर मनाया जाने वाला यह रंगोत्सव भक्तों के लिए जीवन भर की स्मृति बन जाता है।
चंद्र ग्रहण के चलते बदलेगा पूजा का क्रम
इसी दिन शाम 6 बजकर 32 मिनट से चंद्र ग्रहण प्रारंभ होगा। इसके चलते मंदिर में पूजा विधि निर्धारित परंपराओं के अनुसार संचालित की जाएगी। सुबह 6 बजकर 32 मिनट से सूतक प्रभावी माना जाएगा। सूतक के दौरान सुबह 7 बजकर 30 मिनट पर बालभोग आरती और 10 बजकर 30 मिनट पर भोग आरती में भगवान को शकर का भोग अर्पित किया जाएगा।
ग्रहण काल में सभी नियमित गतिविधियां शास्त्रीय नियमों के अनुरूप संपन्न होंगी। मंदिर प्रशासन ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे निर्धारित समय और परंपराओं का पालन करें ताकि सभी अनुष्ठान विधि विधान से पूरे हो सकें।
ग्रहण मोक्ष के बाद शुद्धिकरण और विशेष संध्या आरती
शाम 6 बजकर 46 मिनट पर ग्रहण मोक्ष के पश्चात मंदिर परिसर का विधिवत शुद्धिकरण किया जाएगा। इसके बाद भगवान महाकाल का स्नान पूजन और श्रृंगार होगा। नैवेद्य अर्पित कर संध्या आरती संपन्न की जाएगी।
महाकाल मंदिर की परंपरा के अनुसार प्रातःकालीन बालभोग आरती में दही चावल का भोग लगाया जाता है जबकि नैवेद्य आरती में दाल चावल रोटी सब्जी और मिष्ठान अर्पित किए जाते हैं। इन सभी अनुष्ठानों के माध्यम से होली और ग्रहण से जुड़े धार्मिक विधान पूरी श्रद्धा के साथ संपन्न किए जाएंगे।
उज्जैन का महाकाल मंदिर केवल एक तीर्थ स्थल नहीं बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। होली और ग्रहण जैसे विशेष अवसरों पर यहां का वातावरण भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा से भर उठता है।
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