भाकियू शिक्षक प्रकोष्ठ का बड़ा फैसला: इस साल नहीं मनाएंगे होली, विरोध में मौन संकल्प, TET की अनिवार्यता के खिलाफ लिया फैसला
मुज़फ्फरनगर: भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) के शिक्षक प्रकोष्ठ ने उत्तर प्रदेश में इस बार होली का पर्व न मनाने का एक कड़ा निर्णय लिया है। शिक्षक समुदाय की दुर्दशा और उनकी मांगों को व्यवस्था के सामने रखने के लिए प्रदेश अध्यक्ष रविंद्र सिंह ने एक मार्मिक पत्र जारी किया है, जिसमें शिक्षकों के वर्तमान संकट को रेखांकित किया गया है।
मानसिक और आर्थिक संकट से जूझता शिक्षक समाज
प्रदेश अध्यक्ष रविंद्र सिंह ने अपनी अपील में कहा कि जो शिक्षक समाज को नई दिशा देने का कार्य करते हैं, आज वही शिक्षक समुदाय स्वयं गहरे मानसिक, आर्थिक और सामाजिक संकट से गुजर रहा है। उन्होंने बताया कि प्रदेश का शिक्षक वर्ग वर्तमान में जिस पीड़ा, असुरक्षा और अनिश्चितता का सामना कर रहा है, वह किसी से छिपी नहीं है। टीईटी (TET) की अनिवार्यता से अब तक मुक्ति न मिल पाने के कारण हजारों कार्यरत शिक्षक भविष्य को लेकर भय और भारी मानसिक दबाव में जी रहे हैं।
समस्याओं का अंबार, व्यवस्था बेखबर
ये भी पढ़ें मुजफ्फरनगर: आधी रात शिक्षकों के धरने पर पहुंचे मंत्री कपिल देव, बीएसए की कार्यप्रणाली पर भड़केपत्र में उल्लेख किया गया है कि शिक्षक निरंतर आर्थिक एवं मानसिक शोषण का शिकार हो रहे हैं। वेतन, सेवा-सुरक्षा, पदोन्नति और अन्य विभागीय समस्याओं के समाधान के लिए शिक्षकों को बार-बार कार्यालयों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। अनेक स्थानों पर 'सिटीजन चार्टर' का प्रभावी पालन न होने के कारण उनकी समस्याएं समय पर हल नहीं हो पा रही हैं, जिससे उनमें निराशा और उपेक्षा की भावना गहरी होती जा रही है।
आत्मघाती कदम: एक चेतावनी
रविंद्र सिंह ने पत्र में अत्यंत दुखद स्थिति का ज़िक्र करते हुए कहा कि जब शिक्षक अत्यधिक मानसिक दबाव के चलते आत्मघाती कदम उठाने को मजबूर होते हैं, तो यह पूरे शिक्षक समाज के लिए एक गहरी चेतावनी और पीड़ा का विषय है। उन्होंने कहा कि होली न मनाना किसी परंपरा का विरोध नहीं है, बल्कि अपने साथियों के प्रति संवेदना, शोक और आत्ममंथन का प्रतीक है। यह कदम व्यवस्था, समाज और स्वयं के प्रति एक 'मौन संदेश' है, ताकि शिक्षक की पीड़ा को समझा जा सके।
इस घोषणा के बाद प्रदेश भर के शिक्षकों से अपील की गई है कि वे इस वर्ष होली जैसे उल्लासपूर्ण पर्व को न मनाकर अपनी एकजुटता का परिचय दें और अपनी सुरक्षा व सम्मान के लिए आवाज़ उठाएं।
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कुलदीप सिंह वर्ष 2003 से निरंतर रॉयल बुलेटिन संस्थान के साथ जुड़े हुए हैं। पिछले दो दशकों से अधिक समय से वह संस्थान की प्रगति में अपना महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।
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