T20 World Cup 2026 के बीच रिंकू सिंह पर टूटा दुखों का पहाड़, लिवर कैंसर से पिता खान चंद का निधन
इस समय जहां एक ओर T20 World Cup 2026 का रोमांच चरम पर है वहीं भारतीय टीम के स्टार बल्लेबाज रिंकू सिंह के जीवन में गहरा दुख आ गया है। क्रिकेट के मैदान पर देश के लिए शानदार प्रदर्शन कर रहे रिंकू सिंह के पिता खानचंद का निधन हो गया है। वे लंबे समय से लिवर कैंसर से जूझ रहे थे और ग्रेटर नोएडा के यथार्थ हॉस्पिटल में भर्ती थे। आखिरकार उन्होंने वहीं अंतिम सांस ली और परिवार को गहरे शोक में छोड़ गए।
लंबे समय से चल रहा था इलाज
रिंकू सिंह के पिता की तबीयत काफी समय से खराब थी। उन्हें वेंटिलेटर पर भी रखा गया था। कुछ दिन पहले उनके स्वास्थ्य में हल्का सुधार होने की खबर सामने आई थी जिससे परिवार को उम्मीद जगी थी। हाल ही में रिंकू अपने पिता से मिलने भी पहुंचे थे। इसके बाद वे टीम से जुड़े और जिम्बाब्वे के खिलाफ मुकाबले में फील्डिंग करते नजर आए थे। उस समय शायद ही किसी को अंदाजा था कि इतनी बड़ी दुखद खबर सामने आने वाली है।
अब जब T20 World Cup 2026 का दबाव अपने चरम पर है तब यह व्यक्तिगत आघात रिंकू सिंह के लिए बेहद कठिन समय लेकर आया है। एक ओर देश की उम्मीदें और दूसरी ओर पिता को खोने का दर्द यह पल किसी भी बेटे के लिए बहुत भारी होता है।
संघर्ष भरा रहा परिवार का सफर
रिंकू सिंह के पिता खानचंद उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में एक गैस एजेंसी पर सिलिंडर वितरण का काम करते थे। परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं थी लेकिन उन्होंने कभी हालात को अपने बेटे के सपनों के रास्ते में नहीं आने दिया। दिन रात मेहनत कर उन्होंने घर चलाया और रिंकू को क्रिकेट खेलने के लिए प्रेरित किया।
रिंकू सिंह ने भी बचपन में अपने पिता का हाथ बंटाया। वे खुद सिलिंडर ढोने और पहुंचाने में मदद करते थे। गरीबी और संघर्ष के बीच उन्होंने क्रिकेट के मैदान पर अपनी पहचान बनाई। मेहनत और लगन से वे भारतीय टीम तक पहुंचे और आज T20 World Cup 2026 में देश का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। उनकी सफलता के बाद भी उनके पिता ने अपना काम नहीं छोड़ा जो उनकी सादगी और मेहनत का बड़ा उदाहरण है।
पिता का सपना और रिंकू की जिम्मेदारी
हर खिलाड़ी की सफलता के पीछे उसके परिवार का त्याग छिपा होता है। रिंकू सिंह की सफलता में उनके पिता का योगदान सबसे बड़ा रहा। उन्होंने हमेशा अपने बेटे को आगे बढ़ने की हिम्मत दी। आज जब वे इस दुनिया में नहीं हैं तब भी उनकी सीख और आशीर्वाद रिंकू के साथ रहेंगे।
पूरा देश इस कठिन घड़ी में रिंकू सिंह और उनके परिवार के साथ खड़ा है। उम्मीद है कि वे इस दुख को सहते हुए अपने पिता के सपनों को पूरा करने के लिए और मजबूत बनकर मैदान पर उतरेंगे।
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