'पीएम मोदी' का नाम लेते ही 'अपर्णा यादव' की शुरू हो गई हूटिंग, सावरकर पुण्यतिथि पर आयोजित कार्यक्रम में हंगामा
लखनऊ में कार्यक्रम के दौरान हुआ विरोध; अपर्णा यादव ने सावरकर को 'भारत रत्न' देने की उठाई मांग, साध्वी प्रज्ञा ने साधा गांधी पर निशाना
लखनऊ: राजधानी लखनऊ के इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) सभागार में वीर विनायक दामोदर सावरकर की पुण्यतिथि पर आयोजित एक कार्यक्रम में उस समय हंगामा मच गया, जब भाजपा नेता और राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव को विरोध का सामना करना पड़ा। कार्यक्रम के दौरान जैसे ही अपर्णा यादव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नाम लिया, सभागार में मौजूद लोगों ने हूटिंग शुरू कर दी।
पीएम मोदी का नाम लेने पर जताई आपत्ति
राष्ट्रवाद, हिंदुत्व और महिला सशक्तिकरण विषय पर अपने संबोधन के दौरान अपर्णा यादव ने जैसे ही प्रधानमंत्री का जिक्र किया, वहां मौजूद कुछ लोगों ने इसका विरोध किया। विरोध कर रहे लोगों का आरोप था कि प्रधानमंत्री द्वारा लागू UGC नियमों के कारण समाज का विभाजन हुआ है। हालांकि, अपर्णा यादव ने इन विरोधों के बीच अपना संबोधन जारी रखा। उन्होंने वीर सावरकर को महान क्रांतिकारी बताते हुए केंद्र सरकार से उन्हें 'भारत रत्न' देने की मांग दोहराई और कार्यक्रम में उनकी प्रतिमा स्थापित कराने की भी घोषणा की। उन्होंने कहा कि उन्होंने सपा छोड़कर भाजपा में राष्ट्रवाद और परिवारवाद के खात्मे के उद्देश्य से प्रवेश किया था।
साध्वी प्रज्ञा का गांधी पर विवादित बयान
ये भी पढ़ें नई दिल्ली: खरीफ फसलों के MSP पर मंथन, भाकियू अराजनैतिक ने उठाई एमएसपी को कानूनी गारंटी देने की मांगइस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल हुईं पूर्व सांसद साध्वी प्रज्ञा ठाकुर ने अपने संबोधन में तीखे तेवर दिखाए। उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम के दौरान सावरकर की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि "जो राष्ट्र और कर्तव्य को समझ ले, वही सावरकर कहलाने योग्य है।"
इस दौरान साध्वी प्रज्ञा ने अपनी प्रताड़ना का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि उन्हें एटीएस द्वारा 13 दिनों तक गैर-कानूनी तरीके से बंधक बनाकर रखा गया था और बड़े नेताओं के नाम लेने के लिए दबाव बनाया गया था। महात्मा गांधी पर विवादास्पद टिप्पणी करते हुए प्रज्ञा ने कहा कि देश का बंटवारा करने वाला व्यक्ति 'राष्ट्रपिता' नहीं हो सकता। उन्होंने धर्म और पुरुषार्थ की व्याख्या करते हुए कहा कि अन्याय के विरुद्ध खड़ा होना ही सच्चा धर्म है।
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