मुजफ्फरनगर: एसएसपी दफ्तर और मंडी समिति निकले नगर पालिका के 'करोड़पति' बकायेदार, वसूली को नोटिस जारी
5 करोड़ के टैक्स बकाये पर ईओ प्रज्ञा सिंह का हंटर, राजस्व निरीक्षकों का वेतन रोका; विकास भवन और जिला अस्पताल की देनदारी भी लाखों में
मुजफ्फरनगर। नगर पालिका मुजफ्फरनगर ने वित्तीय वर्ष की समाप्ति से पहले टैक्स वसूली को लेकर कड़ा रुख अख्तियार करते हुए जिले के रसूखदार विभागों की घेराबंदी शुरू कर दी है। जिले के सबसे महत्वपूर्ण एसएसपी कार्यालय और मंडी समिति समेत कई प्रमुख सरकारी भवनों पर जलकर और भवन कर के रूप में 5 करोड़ रुपये से अधिक की भारी-भरकम राशि बकाया है। ईओ प्रज्ञा सिंह ने इस लापरवाही पर कड़ा रुख अपनाते हुए राजस्व निरीक्षकों का जनवरी माह का वेतन रोक दिया है, जिससे पूरे महकमे में हड़कंप मच गया है।
नगर पालिका की रेवेन्यू इंस्पेक्टर पारुल यादव द्वारा जारी आंकड़ों ने सबको चौंका दिया है। जिले की सुरक्षा का जिम्मा संभालने वाले एसएसपी कार्यालय पर नगर पालिका का 96 लाख रुपये का टैक्स बकाया है। वहीं, सबसे बड़ी देनदारी मंडी समिति की है, जिस पर लगभग 3 करोड़ 65 लाख रुपये लंबित हैं। प्रशासन अब इन सभी विभागों को नोटिस जारी कर मार्च माह की समाप्ति से पहले बजट जमा कराने का दबाव बना रहा है। मंडी समिति ने कार्रवाई के डर से फिलहाल 20 लाख रुपये जमा किए हैं, लेकिन बाकी की बड़ी रकम अभी भी शेष है।
ये भी पढ़ें अयोध्या में ‘रन फॉर राम 2026’ का भव्य समापन, हजारों धावकों ने दिखाई आस्था और फिटनेस की मिसालअस्पताल और तहसील भी देनदारों की सूची में टैक्स न भरने वालों की यह फेहरिस्त यहीं खत्म नहीं होती। विकास भवन पर 33 लाख 70 हजार, जिला अस्पताल पर 32 लाख 50 हजार और सदर तहसील पर 20 लाख रुपये का कर लंबे समय से बकाया चला आ रहा है। ईओ प्रज्ञा सिंह ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि सरकारी विभागों से समन्वय स्थापित कर तत्काल वसूली सुनिश्चित की जाए। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि टैक्स जमा नहीं हुआ तो पालिका की विकास योजनाएं प्रभावित होंगी, जिसे कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
वेतन रुकने से राजस्व विभाग में मची खलबली
राजस्व निरीक्षकों का वेतन रोके जाने की खबर के बाद कर्मचारियों में अफरा-तफरी का माहौल है। ईओ के इस कड़े फैसले ने साफ कर दिया है कि इस बार केवल कागजी कार्रवाई से काम नहीं चलेगा। कर्मचारियों को स्पष्ट कहा गया है कि वे फील्ड में उतरें और बड़े बकायेदारों से संपर्क कर सरकारी खजाने को भरें। अधिकारियों ने यह भी संकेत दिए हैं कि यदि सरकारी विभाग जल्द भुगतान नहीं करते, तो शासन स्तर पर भी इसकी रिपोर्ट भेजी जाएगी।
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