MP में नौकरियों का सिस्टम हिला, भर्ती कराने वाला बोर्ड ही खाली 60 प्रतिशत, पद गायब युवाओं का भविष्य संकट में

मध्य प्रदेश से एक ऐसी खबर सामने आई है जो लाखों युवाओं के भविष्य से जुड़ी हुई है। जिस कर्मचारी चयन मंडल पर सरकारी नौकरियों की जिम्मेदारी होती है वही विभाग आज खुद कर्मचारियों की भारी कमी से जूझ रहा है। हालात इतने गंभीर हो चुके हैं कि मंडल के कामकाज पर सीधा असर दिखाई देने लगा है।
187 में से सिर्फ 73 कर्मचारी काम पर
मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल में कुल 187 पद स्वीकृत हैं लेकिन हैरानी की बात यह है कि इनमें से केवल 73 कर्मचारी ही काम कर रहे हैं। बाकी 114 पद खाली पड़े हैं। यानी करीब 60 प्रतिशत पद रिक्त हैं। यह स्थिति किसी भी बड़े सरकारी संस्थान के लिए चिंता का विषय बन गई है।
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इस संकट की सबसे बड़ी बात यह है कि सिर्फ छोटे पद ही नहीं बल्कि कई बड़े और जिम्मेदार पद भी खाली हैं। अतिरिक्त संचालक नियंत्रक संयुक्त संचालक साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ प्रोग्रामर सहायक संचालक लेखा अधिकारी और अधीक्षक जैसे अहम पदों पर भी नियुक्ति नहीं हो पाई है।
डिप्टी कंट्रोलर के अधिकांश पद खाली हैं और सहायक ग्रेड के कई पद भी लंबे समय से खाली पड़े हैं। यही कारण है कि विभाग का काम पूरी क्षमता से नहीं हो पा रहा है।
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स्थिति को संभालने के लिए कई अधिकारियों को अतिरिक्त जिम्मेदारी दी गई है। सामान्य प्रशासन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मंडल के अध्यक्ष का अतिरिक्त प्रभार संभाल रहे हैं जबकि अन्य अधिकारी भी एक से ज्यादा जिम्मेदारियां निभा रहे हैं। इससे काम तो चल रहा है लेकिन व्यवस्था पूरी तरह मजबूत नहीं हो पा रही है।
भर्ती परीक्षाओं पर पड़ रहा सीधा असर
इस कमी का सबसे बड़ा असर भर्ती परीक्षाओं पर पड़ रहा है। पिछले साल मंडल ने 16 परीक्षाएं आयोजित की थीं जबकि इस साल 22 परीक्षाओं की योजना बनाई गई है। लेकिन कर्मचारियों की कमी के कारण कई काम आउटसोर्स कर्मचारियों से कराए जा रहे हैं और निगरानी भी कमजोर पड़ रही है। युवाओं के लिए यह चिंता की बात है क्योंकि भर्ती प्रक्रिया में देरी और गड़बड़ी की संभावना बढ़ जाती है।
मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल की यह स्थिति साफ दिखाती है कि सिस्टम के अंदर सुधार की कितनी जरूरत है। अगर जल्द ही इन खाली पदों को नहीं भरा गया तो इसका असर लाखों उम्मीदवारों के भविष्य पर पड़ सकता है। सरकार के लिए यह एक बड़ा संकेत है कि भर्ती कराने वाले विभाग को ही मजबूत करना अब बेहद जरूरी हो गया है।
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