गुजरात के अहमदाबाद में कुल ₹2.90 करोड़ के नकली नोटों का भंडाफोड़, 6 गिरफ्तार

अहमदाबाद। गुजरात के अहमदाबाद क्राइम ब्रांच ने बीती देर रात अमराईवाड़ी क्षेत्र में बड़ी कार्रवाई करते हुए करोड़ों रुपये की नकली भारतीय मुद्रा जब्त की है। इस मामले में सूरत की एक महिला समेत कुल 6 आरोपिताें को गिरफ्तार किया गया है।
पुलिस के अनुसार, आरोपिताें के पास से कुल ₹2.90 करोड़ की नकली नोट बरामद हुए हैं। इनमें से ₹2.10 करोड़ अहमदाबाद से और ₹80 लाख सूरत से जब्त किए गए हैं। इतनी बड़ी मात्रा में नोटों की गिनती करने में पुलिस को लगभग 6 घंटे का समय लगा।
क्राइम ब्रांच के डीसीपी अजीत राजियन ने आज बताया कि आरोपित चीन से हाई क्वालिटी का पेपर मंगाकर नकली नोट तैयार करते थे। इन नोटों का इस्तेमाल वे खास तौर पर जमीन के सौदों में खपाने के लिए करते थे और इसके लिए आंगड़िया नेटवर्क का भी उपयोग किया जाता था। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपित पहले भी अहमदाबाद में 3-4 वित्तीय लेनदेन कर चुके हैं।
पुलिस ने गुप्त सूचना के आधार पर एक संदिग्ध लग्जरी कार को अमराईवाड़ी में रोका , जिस पर “सत्यम योग फाउंडेशन” लिखा हुआ था। जांच के दौरान कार से भारी मात्रा में नकली नोट बरामद हुए। आरोपित खुद को सरकारी वाहन दिखाने के लिए भारत सरकार और आयुष मंत्रालय के नाम का दुरुपयोग कर रहे थे।
पूछताछ के दौरान इस पूरे रैकेट के तार सूरत तक जुड़े पाए गए। इसके बाद सूरत क्राइम ब्रांच को सूचना दी गई, जहां उधना इलाके में छापेमारी कर हाईटेक प्रिंटिंग मशीन और अन्य उपकरण बरामद किए गए। साथ ही ₹80 लाख की नकली नोट भी जब्त किए गए। क्राइम ब्रांच ने अहमदाबाद और सूरत में कार्रवाई करते हुए अहमदाबाद से ₹2.10 करोड़ और सूरत से ₹80 लाख की नकली नोट बरामद किए।
इस मामले में सत्यम योग फाउंडेशन के प्रदीप गुरुजी को भी गिरफ्तार किया गया है। फिलहाल पुलिस इस पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही है और आशंका है कि इस गिरोह के और भी बड़े कनेक्शन सामने आ सकते हैं।
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लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

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