यूपी में अब ऐसे लगेगी अपराधों पर लगाम: यूपी स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंसेज में जल्द शुरू होंगी पांच हाई-टेक लैब्स
क्वांटम कंप्यूटिंग से लेकर 3-डी प्रिंटिंग तक, फॉरेंसिक जांच में अब एआई और आधुनिक तकनीक का होगा इस्तेमाल

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने प्रदेश में अपराध की बदलती प्रकृति और साइबर चुनौतियों से निपटने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर 'यूपी स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंसेज' (UPSIFS) में जल्द ही पांच नई अत्याधुनिक लैब्स स्थापित की जाएंगी। इन लैब्स के माध्यम से न केवल अपराधों की जांच में तेजी आएगी, बल्कि यूपी पुलिस के जवानों और संस्थान के छात्रों को आधुनिकतम साक्ष्य विश्लेषण का प्रशिक्षण भी मिलेगा।
योगी सरकार द्वारा संस्थान में जिन नई लैब्स को मंजूरी दी गई है, उनमें जटिल डेटा एनालिसिस और एन्क्रिप्शन से जुड़े साइबर मामलों को सुलझाने के लिए क्वांटम कंप्यूटिंग लैब, खराब गुणवत्ता वाले ऑडियो-वीडियो को साक्ष्य के रूप में स्पष्ट करने हेतु चैलेंज्ड ऑडियो-वीडियो लैब,क्राइम सीन का मॉडल तैयार करने और घटनाओं के रीक्रिएशन के लिए 3-डी प्रिंटिंग लैब, औद्योगिक और बुनियादी ढांचे पर होने वाले साइबर हमलों की सुरक्षा के लिए एससीएडीए लैब तथा मोबाइल और कंप्यूटर से डेटा रिकवरी और वित्तीय धोखाधड़ी की जांच हेतु डिजिटल फॉरेंसिक लैब शामिल हैं।
दोषियों को जल्द सजा दिलाने में मिलेगी मदद
इंस्टीट्यूट के निदेशक डॉ. जीके गोस्वामी ने बताया कि वर्तमान में संस्थान में पांच लैब्स (जैसे एडवांस्ड डीएनए प्रोफाइलिंग और एआई-ड्रोन) पहले से संचालित हैं। नई लैब्स के जुड़ने से डिजिटल साक्ष्यों की विश्वसनीयता बढ़ेगी, जिससे अदालत में मजबूत केस पेश किए जा सकेंगे। 3-डी प्रिंटिंग के जरिए अब क्राइम सीन को अदालत के सामने हूबहू रीक्रिएट किया जा सकेगा, जिससे न्याय प्रक्रिया में पारदर्शिता और गति आएगी।
नियोजित विकास और पारदर्शी न्याय
योगी सरकार का उद्देश्य फॉरेंसिक इंफ्रास्ट्रक्चर को इतना मजबूत करना है कि अपराधियों के बचने की कोई गुंजाइश न रहे। वैज्ञानिक साक्ष्य आधारित जांच से केसों के निस्तारण में तेजी आएगी और निर्दोषों को न्याय व दोषियों को तत्काल सजा सुनिश्चित हो सकेगी। यह पहल उत्तर प्रदेश को अपराध मुक्त बनाने की दिशा में एक 'गेम चेंजर' साबित होगी।
रॉयल बुलेटिन से जुड़ें:
देश-प्रदेश की ताज़ा ख़बरों को सबसे पहले पढ़ने के लिए हमारे सोशल मीडिया हैंडल को फॉलो करें:
आपको यह खबर कैसी लगी? अपनी राय नीचे कमेंट बॉक्स में ज़रूर दे। आपकी राय रॉयल बुलेटिन को और बेहतर बनाने में बहुत उपयोगी होगी।
संबंधित खबरें
लेखक के बारे में
ओ.पी. पाल पिछले साढ़े तीन दशकों से पत्रकारिता में सक्रिय एक प्रतिष्ठित नाम हैं। भारत सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त (P.I.B. Accredited) वरिष्ठ पत्रकार श्री पाल ने लंबे समय तक लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही के साथ-साथ गृह, रक्षा और कृषि जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालयों की नेशनल ब्यूरो स्तर पर रिपोर्टिंग की है।
अमर उजाला और दैनिक जागरण से पत्रकारिता की शुरुआत करने वाले श्री पाल ने 'शाह टाइम्स' में न्यूज़ एडिटर और 'हरिभूमि' (दिल्ली) में वरिष्ठ संवाददाता के रूप में लंबी सेवाएं दी हैं। राजनीति विज्ञान और कृषि के विशेषज्ञ होने के साथ-साथ वे 'साहित्य रत्न' से भी विभूषित हैं। वर्तमान में वे एक स्वतंत्र पत्रकार और स्तंभकार के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

टिप्पणियां