झारखंड के रामगढ़ उपचुनाव में दो सियासी परिवारों के बीच है मुकाबला, 27 को पड़ेंगे वोट
रांची | झारखंड की रामगढ़ विधानसभा सीट पर आगामी 27 फरवरी को होनेवाले उपचुनाव के लिए रणक्षेत्र सज चुका है। वैसे तो यहां 18 उम्मीदवार चुनावी मैदान में हैं पर यहां असली मुकाबला दो परिवारों के बीच है। यह चुनाव दो पतियों की ओर से अपनी पत्नियों के सम्मान में लड़ी जा रही लड़ाई के […]
रांची | झारखंड की रामगढ़ विधानसभा सीट पर आगामी 27 फरवरी को होनेवाले उपचुनाव के लिए रणक्षेत्र सज चुका है। वैसे तो यहां 18 उम्मीदवार चुनावी मैदान में हैं पर यहां असली मुकाबला दो परिवारों के बीच है। यह चुनाव दो पतियों की ओर से अपनी पत्नियों के सम्मान में लड़ी जा रही लड़ाई के कारण दिलचस्प होने जा रहा है।
चुनाव में एक ओर कांग्रेस प्रत्याशी बजरंग महतो हैं, जिनकी पत्नी ममता देवी जेल में हैं। ममता देवी ने इस सीट पर 2019 में कांग्रेस प्रत्याशी के तौर पर जीत दर्ज की थी, लेकिन एक आपराधिक मामले में पांच साल की सजा के चलते उनकी विधायकी चली गई और इसी वजह से यहां हो रहे उपचुनाव में कांग्रेस ने उनके पति को प्रत्याशी बनाया है।
मुकाबले में दूसरी ओर गिरिडीह के सांसद चंद्रप्रकाश चौधरी की पत्नी आजसू पार्टी की सुनीता चौधरी हैं, जिन्हें एनडीए ने उम्मीदवार बनाया है। 2019 के चुनाव में भी सुनीता चौधरी अपने सांसद पति के राजनीतिक रसूख के भरोसे उम्मीदवार बनी थीं, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा था।
इस तरह मुकाबला पूर्व विधायक ममता देवी के पति बजरंग महतो और सांसद चंद्रप्रकाश चौधरी की पत्नी सुनीता चौधरी के बीच में है। बजरंग महतो जहां कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में गठबंधन के घटक दलों के सहयोग से चुनाव लड़ रहे हैं वहीं सुनीता चौधरी एनडीए उम्मीदवार के रूप में चुनाव के मैदान में हैं।
अगर जमीनी समीकरण की बात की जाए तो ममता देवी क्षेत्र की लोकप्रिय विधायक रह चुकी हैं और एक केस के सिलसिले में उनकी विधायकी गयी है,इसलिए उनके पति बजरंग महतो को सहानुभूति वोटों का लाभ मिल सकता है। दूसरी तरफ सुनीता चौधरी चूंकि गिरिडीह से सांसद चंद्रप्रकाश चौधरी की पत्नी हैं और चंद्रप्रकाश रामगढ़ से विधायक रह चुके हैं इसलिए क्षेत्र में उनके चाहनेवाले भी कम नहीं हैं।
एनडीए उम्मीदवार सुनीता चौधरी के लिए सबल पक्ष ये है कि भाजपा और आजसू के कद्दावर नेता उनकी जीत सुनिश्चित करने के लिए जोर लगा रहे हैं। चाहे वो बाबूलाल मरांडी हों या दीपक प्रकाश या फिर सुदेश महतो, सब उनके पक्ष में प्रचार करेंगे। बजरंग महतो चूंकि पिछले चुनाव में अपनी पत्नी ममता देवी के चुनाव प्रचार की कमान संभाल चुके हैं इसलिए क्षेत्र के चुनावी समीकरण से वे भलीभांति परिचित हैं।
रामगढ़ उपचुनाव को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भी चुनौती के रूप में लिया है और बुधवार को हुई बैठक में उन्होंने अपनी पार्टी के साथ कांग्रेस और राजद के नेताओं से मिलकर जीत की रणनीति पर चर्चा की। महागठबंधन के नेताओं का समग्रता में साथ मिलना भी बजरंग महतो के पक्ष में जाता है। छह प्रमुख वामदलों ने रामगढ़ उपचुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार को समर्थन देने का ऐलान किया है। माकपा, भाकपा, भाकपा (माले), फारवर्ड ब्लाक, आरएसपी और मासस ने रामगढ़ उप चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार बजरंग महतो को समर्थन दिए जाने का फैसला लिया।
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लेखक के बारे में
रॉयल बुलेटिन के संस्थापक एवं मुख्य संपादक अनिल रॉयल ने वर्ष 1985 में मात्र 17 वर्ष की आयु से मुज़फ्फरनगर की पावन भूमि से निर्भीक और जनपक्षधर पत्रकारिता का संकल्प लिया। बीते लगभग चार दशकों से वे पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सशक्त और विश्वसनीय आवाज़ के रूप में पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं।
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