बद्रीनाथ-केदारनाथ में मुस्लिम-ईसाई प्रवेश: BKTC अध्यक्ष अजेय अजय ने बताईं शर्तें..कहा— गैर-हिंदुओं को पहले लिखित में देनी होगी सनातन में आस्था

उत्तराखंड के सुप्रसिद्ध चारधाम (बद्रीनाथ और केकेदारनाथ) में गैर-हिंदुओं के प्रवेश को लेकर चल रही लंबी बहस के बीच बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) के अध्यक्ष अजेय अजय का एक बड़ा और स्पष्ट बयान सामने आया है। उन्होंने साफ कर दिया है कि मुस्लिम, ईसाई या किसी भी अन्य धर्म के व्यक्ति को धाम में प्रवेश मिल सकता है, लेकिन इसके लिए कुछ कड़ी शर्तें अनिवार्य होंगी।
यह बयान सोशल मीडिया पर चल रहे उस 'नॉन-हिंदू' बैन (Non-Hindu Ban) के दावों के बीच आया है, जिसमें कहा जा रहा था कि गैर-हिंदुओं का प्रवेश पूरी तरह वर्जित होगा। यदि कोई मुस्लिम या ईसाई व्यक्ति भगवान बद्रीविशाल या बाबा केदारनाथ के दर्शन करना चाहता है, तो उसे पहले एक लिखित स्वघोषणा (Self-declaration) देनी होगी। इसमें उन्हें यह लिखना होगा कि वे 'सनातन धर्म और इन देवी-देवताओं में पूर्ण श्रद्धा एवं आस्था' रखते हैं।
: मंदिर परिसर के भीतर किसी भी प्रकार की ऐसी गतिविधि बर्दाश्त नहीं की जाएगी जो हिंदू धर्म की मान्यताओं के विपरीत हो। प्रवेश पाने वाले व्यक्ति को मंदिर के सभी नियमों, शुद्धता और शुचिता का पालन करना होगा।
सुरक्षा की दृष्टि से और 'लैंड जिहाद' या 'जनसांख्यिकीय बदलाव' की चिंताओं को देखते हुए, यात्रियों के वेरिफिकेशन (सत्यापन) की प्रक्रिया को और सख्त किया जाएगा।
पिछले कुछ समय से उत्तराखंड के तीर्थ पुरोहितों और हिंदू संगठनों की ओर से 'मर्यादा' को लेकर मांग उठ रही थी केदारनाथ और बद्रीनाथ जैसे क्षेत्रों में गैर-हिंदुओं द्वारा व्यापारिक गतिविधियां चलाने और वहां अनैतिक कृत्यों (जैसे मांस-मदिरा या रील बनाना) की खबरें आई थीं
तीर्थ पुरोहितों का कहना है कि ये पवित्र स्थान 'पर्यटन स्थल' (Picnic Spot) नहीं बल्कि 'आस्था के केंद्र' हैं, इसलिए यहाँ केवल उन्हीं को आना चाहिए जिनकी इनमें श्रद्धा हो स्थानीय संगठनों ने 'देवभूमि' की सांस्कृतिक विरासत और जनसांख्यिकीय संतुलन बनाए रखने के लिए गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर कड़े नियम बनाने की मांग की थी।
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लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

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