अंकिता भंडारी हत्याकांड: सीबीआई ने अपने हाथ में ली जांच, 'अनजान वीआईपी' के खिलाफ केस दर्ज किया
नई दिल्ली। उत्तराखंड के बहुचर्चित अंकिता भंडारी मर्डर केस की जांच सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (सीबीआई) ने अपने हाथ में ले ली है। साथ ही, इस मामले में दिल्ली स्थित स्पेशल क्राइम ब्रांच ने एक वीआईपी के खिलाफ केस दर्ज किया है। सीबीआई की टीम के दो सदस्य सोमवार देर रात उत्तराखंड पहुंचे ताकि लड़की की हत्या से जुड़े कथित वीआईपी एंगल की डिटेल में जांच कर सकें। यह केस उस वक्त फिर से सुर्खियों में आया जब भाजपा के पूर्व विधायक सुरेश राठौर और उनकी कथित पत्नी उर्मिला सनावर से जुड़े वायरल ऑडियो क्लिप और वीडियो सामने आए।
एक फेसबुक लाइव के दौरान, सनावर ने हत्या में एक वीआईपी के कथित तौर पर शामिल होने का जिक्र किया, जिससे नया विवाद और पब्लिक में बहस शुरू हो गई। इन घटनाओं से राजनीतिक तनाव बढ़ गया और विपक्षी पार्टियों और कई संगठनों ने मामले की सीबीआई जांच की मांग फिर से शुरू कर दी। बढ़ते दबाव और लोगों की चिंताओं को दूर करने के लिए, उत्तराखंड सरकार ने ट्रांसपेरेंसी सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाए और 9 जनवरी को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस मामले में सीबीआई जांच की सिफारिश की। सरकार ने दोहराया कि किसी भी व्यक्ति को, चाहे वह किसी भी रसूख या पद पर हो, कानून से बचने नहीं दिया जाएगा और ज़ोर दिया कि पूरा सच सामने लाना उसकी सबसे बड़ी प्राथमिकता है।
बता दें कि 19 साल की रिसेप्शनिस्ट अंकिता भंडारी की हत्या से 2022 में पूरे उत्तराखंड में बहुत गुस्सा फैल गया। अंकिता भंडारी 18 सितंबर, 2022 को वनतंत्र रिजॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के तौर पर काम कर रही थीं, जब उनकी हत्या कर दी गई। उनकी बॉडी चिल्ला शक्ति नहर में फेंक दी गई और लगभग एक हफ्ते बाद मिली थी। स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम द्वारा पूरी जांच के बाद, मामले में 500 पेज की चार्जशीट फाइल की गई, जिसमें 97 गवाहों के नाम थे, जिनमें से 47 ने कोर्ट के सामने गवाही दी। इस मामले में अदालत ने मुख्य आरोपी वनतंत्रा रिजॉर्ट के मालिक पुलकित आर्या, साथ ही सह-आरोपी सौरभ भास्कर और अंकित गुप्ता को दोषी ठहराया और उम्रकैद की सजा सुनाई। पुलकित आर्या को हत्या, सबूतों से छेड़छाड़, उत्पीड़न और अनैतिक तस्करी सहित कई गंभीर आरोपों के तहत दोषी पाया गया।
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लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

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