गीदड़ बनो या शेर: कर्म और साहस का संदेश
कायरता केवल डरपोक होने का नाम नहीं है। वास्तविक कायर वह है, जो अपनी समस्याओं से भागता है, कर्तव्य से मुंह मोड़ता है और चुनौतियों का सामना करने से बचता है। थककर बैठ जाना या हर काम को भाग्य पर छोड़ देना भी कायरता है।
समाज में ऐसे निष्क्रिय और पापी व्यक्तियों के लिए स्थान नहीं होता। इसलिए क्रियाशील रहना अनिवार्य है, लेकिन यह क्रियाशीलता केवल स्वयं के लिए नहीं, बल्कि दूसरों के लाभ के लिए भी होनी चाहिए।
सच्चा पुरूषार्थ तभी स्वीकार्य होता है जब उसमें नम्रता भी शामिल हो। परिश्रम के साथ यदि आप ईमानदारी और विनम्रता से परमेश्वर से प्रार्थना करेंगे, तो सफलता निश्चित होगी। परंतु यह प्रार्थना विवेकपूर्ण होनी चाहिए, जिससे किसी को हानि न पहुंचे। कर्म की वास्तविक सफलता और सौंदर्य तब है, जब आपके जी-जान से किए गए प्रयास पर प्रभु की कृपा भी प्राप्त हो।
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लेखक के बारे में
"गन्ना विभाग के सेवानिवृत्त अधिकारी प्रण पाल सिंह राणा बहुमुखी प्रतिभा के धनी हैं। प्रशासनिक सेवाओं में एक लंबा और सफल कार्यकाल बिताने के साथ-साथ, पिछले 50 वर्षों से ज्योतिष, वेद और अध्यात्म के प्रति उनकी गहरी रुचि ने उन्हें एक विशिष्ट पहचान दी है।
श्री राणा पिछले 30 वर्षों से 'रॉयल बुलेटिन' के माध्यम से प्रतिदिन 'अनमोल वचन' स्तंभ लिख रहे हैं, जो पाठकों के बीच अत्यंत लोकप्रिय है। उनके लिखे विचार न केवल ज्ञानवर्धक होते हैं, बल्कि पाठकों को जीवन की चुनौतियों के बीच सकारात्मक दिशा और मानसिक शांति भी प्रदान करते हैं। प्राचीन वैदिक ज्ञान को आधुनिक जीवन से जोड़ने की उनकी कला को पाठकों द्वारा वर्षों से सराहा और पसंद किया जा रहा है।"

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