श्रद्धा और विश्वास: जीवन में शक्ति और सफलता की कुंजी
गतिशीलता का अभाव: यदि मनुष्य के भीतर विश्वास की कमी है, तो उसका जीवन ठहर जाता है। संदेह व्यक्ति की मानसिक शक्ति और आत्मबल को क्षीण कर देता है, जिससे पग-पग पर विपत्तियां भारी लगने लगती हैं।
पश्चिमी सभ्यता का प्रभाव: आज का मानव अपनी जड़ों से कट रहा है। आधुनिकता की अंधी दौड़ में हम अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और आध्यात्मिक ऊर्जा को खोते जा रहे हैं। इसका परिणाम यह है कि हम 'न घर के रहे, न घाट के'—अर्थात न हम आध्यात्मिक शांति पा सके और न ही भौतिक संसार में पूर्णता।
मानवता का विकास: श्रद्धा केवल ईश्वर के प्रति नहीं, बल्कि मानवीय मूल्यों के प्रति भी होनी चाहिए। यही वह तत्व है जो पशुवत प्रवृत्तियों को खत्म कर मनुष्य में 'मनुष्यता' का विकास करती है।
भय से मुक्ति: असफलता और पराजय का डर केवल उसे सताता है जिसके पास विश्वास की कमी है। एक श्रद्धावान व्यक्ति विपरीत परिस्थितियों में भी विचलित नहीं होता, क्योंकि उसे यह अटूट विश्वास होता है कि कोई परमसत्ता उसके साथ है।
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लेखक के बारे में
"गन्ना विभाग के सेवानिवृत्त अधिकारी प्रण पाल सिंह राणा बहुमुखी प्रतिभा के धनी हैं। प्रशासनिक सेवाओं में एक लंबा और सफल कार्यकाल बिताने के साथ-साथ, पिछले 50 वर्षों से ज्योतिष, वेद और अध्यात्म के प्रति उनकी गहरी रुचि ने उन्हें एक विशिष्ट पहचान दी है।
श्री राणा पिछले 30 वर्षों से 'रॉयल बुलेटिन' के माध्यम से प्रतिदिन 'अनमोल वचन' स्तंभ लिख रहे हैं, जो पाठकों के बीच अत्यंत लोकप्रिय है। उनके लिखे विचार न केवल ज्ञानवर्धक होते हैं, बल्कि पाठकों को जीवन की चुनौतियों के बीच सकारात्मक दिशा और मानसिक शांति भी प्रदान करते हैं। प्राचीन वैदिक ज्ञान को आधुनिक जीवन से जोड़ने की उनकी कला को पाठकों द्वारा वर्षों से सराहा और पसंद किया जा रहा है।"

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