सत्संग का महत्व: सज्जनों के संग से जीवन बनाएं सार्थक
चंदन के वन की सुगंध जैसे पास के पेड़ भी महक उठते हैं, वैसे ही सज्जनों की संगति से दुर्जन व्यक्ति भी अच्छा बन सकता है। यही कारण है कि सत्संग परममोक्ष का साधन है।
यदि कोई व्यक्ति अच्छे लोगों के साथ समय बिताकर ईश्वर भक्ति करता है और सन्मार्ग पर चलता है, तो उसे ईश्वर की कृपा मिलती है। इसके विपरीत, जो लोग दिन-रात बुरी संगति में उलझे रहते हैं और केवल शरीर-संस्कार में लगे रहते हैं, उन्हें समाज में हीन दृष्टि से देखा जाता है और आध्यात्मिक दृष्टि से उनका पतन होता है।
सत्संग स्वयं में तीर्थ है। जो व्यक्ति शुद्ध सत्संग में समय बिताता है, वह अन्य किसी तीर्थ का दर्शन किए बिना भी पुण्य और शांति प्राप्त कर सकता है। संतों की संगति करने से जीवन के दुख और समस्याएं दूर होती हैं।
इसलिए ज्ञानी, अहिंसक, दानी और परोपकारी लोगों की संगति में समय बिताकर, व्यक्ति अपने जीवन को सार्थक और धन्य बना सकता है।
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लेखक के बारे में
"गन्ना विभाग के सेवानिवृत्त अधिकारी प्रण पाल सिंह राणा बहुमुखी प्रतिभा के धनी हैं। प्रशासनिक सेवाओं में एक लंबा और सफल कार्यकाल बिताने के साथ-साथ, पिछले 50 वर्षों से ज्योतिष, वेद और अध्यात्म के प्रति उनकी गहरी रुचि ने उन्हें एक विशिष्ट पहचान दी है।
श्री राणा पिछले 30 वर्षों से 'रॉयल बुलेटिन' के माध्यम से प्रतिदिन 'अनमोल वचन' स्तंभ लिख रहे हैं, जो पाठकों के बीच अत्यंत लोकप्रिय है। उनके लिखे विचार न केवल ज्ञानवर्धक होते हैं, बल्कि पाठकों को जीवन की चुनौतियों के बीच सकारात्मक दिशा और मानसिक शांति भी प्रदान करते हैं। प्राचीन वैदिक ज्ञान को आधुनिक जीवन से जोड़ने की उनकी कला को पाठकों द्वारा वर्षों से सराहा और पसंद किया जा रहा है।"

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