शुभ कार्य में मुहूर्त की प्रतीक्षा क्यों?
हम सामान्यतः कोई शुभ कार्य प्रारंभ करने से पहले उसके लिए शुभ मुहूर्त निकलवाते हैं। परंतु मनीषियों का कहना है कि अच्छे और शुभ कार्य को तुरंत करना चाहिए, उसमें मुहूर्त की प्रतीक्षा करने की आवश्यकता नहीं है। किसी भी शुभ कार्य का परिणाम अच्छा ही होता है, चाहे उसे किसी भी समय किया जाए। वहीं बुरे कार्य का परिणाम हमेशा बुरा ही होता है, चाहे उसे कितने भी शुभ मुहूर्त में किया जाए।
अच्छे विचार और अच्छी सोच ही मनुष्य को विपत्ति से बचाते हैं। सत्य एक है, लेकिन मनीषियों ने उसे विभिन्न भाषाओं और तरीकों से व्यक्त किया है। इसी प्रकार परमपिता परमात्मा भी एक हैं, जिन्हें क्षेत्र, भाषा और परिवेश के आधार पर अलग-अलग नामों से पुकारा गया। नाम बदलने से वे बदल नहीं जाते।
माना जाता है कि माता-पिता को विभिन्न धर्म शास्त्रों में अलग-अलग नामों से जाना गया है। पुराण में शिव-पार्वती, रात में आदम-हव्वा और बाइबल में एडम-इव। नाम बदलने से वे बदल नहीं जाते, मूलतः हमारे माता-पिता एक ही थे और हम सभी उनकी संतानें हैं।
कबीर के शब्दों में भी यही संदेश है: “हिंदू कहे मोये राम प्यारा, मुस्लिम कहे रहमान, आपस में दोऊ लड़ मरे मर्म न कोई जाना।”
आज का शुभ कार्य यही है कि हम यह जान लें कि हम सभी एक ही माता-पिता की संतानें हैं। आपसी मतभेद भुलाकर प्रेम और सौहार्द के साथ रहने का प्रयास अभी से आरंभ करें।
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लेखक के बारे में
"गन्ना विभाग के सेवानिवृत्त अधिकारी प्रण पाल सिंह राणा बहुमुखी प्रतिभा के धनी हैं। प्रशासनिक सेवाओं में एक लंबा और सफल कार्यकाल बिताने के साथ-साथ, पिछले 50 वर्षों से ज्योतिष, वेद और अध्यात्म के प्रति उनकी गहरी रुचि ने उन्हें एक विशिष्ट पहचान दी है।
श्री राणा पिछले 30 वर्षों से 'रॉयल बुलेटिन' के माध्यम से प्रतिदिन 'अनमोल वचन' स्तंभ लिख रहे हैं, जो पाठकों के बीच अत्यंत लोकप्रिय है। उनके लिखे विचार न केवल ज्ञानवर्धक होते हैं, बल्कि पाठकों को जीवन की चुनौतियों के बीच सकारात्मक दिशा और मानसिक शांति भी प्रदान करते हैं। प्राचीन वैदिक ज्ञान को आधुनिक जीवन से जोड़ने की उनकी कला को पाठकों द्वारा वर्षों से सराहा और पसंद किया जा रहा है।"

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