एकल परिवार-सुख भी, तनाव भी

On

परिवार अब पहले की तरह नहीं रहे हैं। परिवार में अब पति-पत्नी और बच्चों की ही दुनिया सिमट कर रह गई है। इसमें पारिवारिक दबाव भी कम होते हैं। प्रत्येक व्यक्ति को अलग स्वतंत्रता होती है। महिलाओं को एकल परिवार ज्यादातर पसंद आता है क्योंकि संयुक्त परिवारों में उन पर घर के काम का बोझ […]

परिवार अब पहले की तरह नहीं रहे हैं। परिवार में अब पति-पत्नी और बच्चों की ही दुनिया सिमट कर रह गई है। इसमें पारिवारिक दबाव भी कम होते हैं। प्रत्येक व्यक्ति को अलग स्वतंत्रता होती है।

महिलाओं को एकल परिवार ज्यादातर पसंद आता है क्योंकि संयुक्त परिवारों में उन पर घर के काम का बोझ अधिक होता है जबकि एकल परिवारों में उन पर काम का दबाव कम होता है। दूसरे उनका स्वतंत्र व्यक्तित्व उभर कर आता है। वे अपने निर्णय स्वयं लेने लगी हैं। पति के साथ भी उनका रिश्ता अलग ही रंग लेकर आ रहा है।

संयुक्त परिवारों में बढ़ते बच्चों पर ज्यादा टोकाटाकी की जाती है। उन्हें प्रत्येक व्यक्ति अपने तरीके से सही गलत की राय देता है जिससे वे कन्फ्यूज होकर रह जाते हैं। वे अपनी सोच के अनुसार सही-गलत का निर्णय नहीं ले पाते। एकल परिवार में कम लोग होते हैं तो बच्चा भी कन्फ्यूज नहीं होता और वह सही-गलत का निर्णय कर पाता है।

एकल परिवारों में खर्चा कम होने से भी ये परिवार आर्थिक रूप से मजबूत होते हैं। दूसरे एकल परिवारों में जगह की भी कमी नहीं रहती। रहने के लिए पर्याप्त जगह मिलती है जबकि संयुक्त परिवारों में जगह का हमेशा अभाव ही रहता है।

इन सबसे यह निष्कर्ष नहीं निकलता कि एकल परिवार बेहतर होते हैं। जीवन जीने के लिए संयुक्त परिवार की सुरक्षा भी अपनी जगह होती है। संयुक्त परिवार में रहकर जो सुविधाएं आपको मिल सकती हैं वे एकल परिवार में नहीं मिल सकती।

खासकर नौकरीपेशा महिलाओं के लिए संयुक्त परिवार के कई फायदे हैं। अपने बच्चों की देखभाल के लिए वे संयुक्त परिवार में ही तनावमुक्त रह सकती है क्योंकि परिवार में ही उन्हें सही पालन-पोषण मिल सकता है।

परिवार से अलग ऐसी कोई व्यवस्था नहीं जहां मां अपने बच्चों को बेफिक्र  होकर छोड़कर जा सके। या तो उसे अपने घर में आया लगानी होगी या फिर अपने बच्चे को क्रच वगैरह में छोडऩा पड़ेगा। उस पर नौकरी के समय की परेशानी। देर शाम या रात की नौकरी के साथ तो यह सुविधा भी आपके बच्चे को नहीं मिल सकती। इसलिए ऐसे में संयुक्त परिवार ही सुरक्षा एवं सुविधा की दृष्टि से उत्तम रहते हैं।

अब जीवन की परंपरागत शैली से हटकर लोगों में संयुक्त परिवारों के बीच में एकल व्यवस्था की जाने लगी है। घर के सदस्यों को व्यक्तिगत आजादी दी जाती है। जो परिवार आर्थिक रूप से अच्छी स्थिति में होते हैं वहां अपने विवाहित  बच्चों के लिए अलग-अलग कमरे और किचन बनाकर दे दी जाती है, या घर की अलग -अलग मंजिलें बनाकर उन्हें दे दी जाती हैं। इससे उनकी जिंदगी में निजता और स्वतंत्रता बनी रहती है और संयुक्त परिवार की सारी सुविधाएं भी उन्हें मिलती हैं।

कई बार माता-पिता स्वयं ही अलग रहना चाहते हैं। उन्हें अपने बच्चों की जीवन शैली का तरीका नहीं भाता इसलिए वे किसी तनाव या लड़ाई झगड़े के बगैर अलग-अलग रहने लगते हैं। इसके लिए उन्हें ज्यादा दूर जाने की भी जरूरत नहीं होती। ऐसे में वे आमने सामने भी रह सकते हैं। इससे उनकी अपनी स्वतंत्रता भी बनी रहती है और आपसी प्रेम भी बना रहता है। जरूरत के समय वे एक दूसरे के काम भी आ पाते हैं।

मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है और समाज में रहने के लिए उसे सुरक्षा भी चाहिए जो उसे संयुक्त परिवार के साथ ही मिलती है। दूसरे प्रत्येक व्यक्ति की अपनी निजता भी होती है जो उसे एकल परिवार में ही मिलती है। कई बार वह जानबूझकर संयुक्त परिवार को छोड़कर अलग घर बसाता है तो कई बार उसकी मजबूरी होती है।

चाहे जो भी हो, एकल परिवार के जहां कुछ फायदे हैं तो वहीं कुछ परेशानियां भी हैं। ठीक इसी तरह संयुक्त परिवार के भी कुछ फायदे और नुकसान हैं।

बस यह हमेशा ध्यान रखें कि चाहे कहीं भी रहें मगर आपसी रिश्तों में किसी भी तरह की दूरी या दरार न आये। तीज-त्योहार और दुख-सुख में हमेशा साथ रहेंगे तो एकल होकर भी आप संयुक्त ही कहलायेंगे।
– शिखा चौधरी

आपको यह खबर कैसी लगी? अपनी राय नीचे कमेंट बॉक्स में ज़रूर दे। आपकी राय रॉयल बुलेटिन को और बेहतर बनाने में बहुत उपयोगी होगी।

टिप्पणियां

संबंधित खबरें

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर हमें फॉलो करें और हमसे जुड़े रहें।
(Follow us on social media platforms and stay connected with us.)

Youtube – https://www.youtube.com/@RoyalBulletinIndia
Facebook – https://www.facebook.com/royalbulletin
Instagram: https://www.instagram.com/royal.bulletin/
Twitter – https://twitter.com/royalbulletin
Whatsapp – https://chat.whatsapp.com/Haf4S3A5ZRlI6oGbKljJru

लेखक के बारे में

अनिल रॉयल | Founder and Editor-in-Chief Picture

रॉयल बुलेटिन के संस्थापक एवं मुख्य संपादक अनिल रॉयल ने वर्ष 1985 में मात्र 17 वर्ष की आयु से मुज़फ्फरनगर की पावन भूमि से निर्भीक और जनपक्षधर पत्रकारिता का संकल्प लिया। बीते लगभग चार दशकों से वे पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सशक्त और विश्वसनीय आवाज़ के रूप में पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं।

पत्रकारिता के अपने लंबे अनुभव के आधार पर उन्होंने वर्ष 2010 में नोएडा से रॉयल बुलेटिन के प्रिंट संस्करण का सफल विस्तार किया। समय के साथ बदलते मीडिया परिदृश्य को समझते हुए, उनके नेतृत्व में यह संस्थान आज एक मजबूत और प्रभावशाली डिजिटल समाचार मंच के रूप में स्थापित हो चुका है।

वर्तमान में रॉयल बुलेटिन की पहुँच न्यूज़ पोर्टल, फेसबुक, यूट्यूब, इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप सहित सभी प्रमुख डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर करोड़ों पाठकों तक है। प्रिंट और डिजिटल मीडिया के स्वामी एवं संपादक के रूप में अनुभव, सत्यनिष्ठा और जन-सरोकार उनकी पत्रकारिता की मूल आधारशिला रहे हैं।

नवीनतम

सोने-चांदी की कीमतों में भारी उथल-पुथल: चांदी 18 दिनों में 1.46 लाख रुपये लुढ़की, आज भी लुढ़की, सोना भी हुआ सस्ता

नई दिल्ली/मुजफ्फरनगर। भारतीय सर्राफा बाजार में इन दिनों जबरदस्त उथल-पुथल मची हुई है। पिछले 18 दिनों के भीतर कीमती धातुओं...
Breaking News  बिज़नेस 
सोने-चांदी की कीमतों में भारी उथल-पुथल: चांदी 18 दिनों में 1.46 लाख रुपये लुढ़की, आज भी लुढ़की, सोना भी हुआ सस्ता

ग्रेटर नोएडा: बिलासपुर में अवैध निर्माण पर बुलडोजर, 37.5 करोड़ के निर्माण को ध्वस्त

  नोएडा। ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने सोमवार को अधिसूचित क्षेत्र बिलासपुर में 18770 वर्ग मीटर जमीन पर हुएअवैध निर्माण पर   ग्रेटर...
दिल्ली NCR  नोएडा 
ग्रेटर नोएडा: बिलासपुर में अवैध निर्माण पर बुलडोजर, 37.5 करोड़ के निर्माण को ध्वस्त

सहारनपुर: यूपी बोर्ड परीक्षाओं के लिए प्रशासन मुस्तैद, 89 केंद्रों पर 66 हजार से अधिक छात्र देंगे परीक्षा

सहारनपुर। जनपद में 18 फरवरी से शुरू होने जा रही यूपी बोर्ड की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षाओं को लेकर प्रशासन...
उत्तर प्रदेश  सहारनपुर 
सहारनपुर: यूपी बोर्ड परीक्षाओं के लिए प्रशासन मुस्तैद, 89 केंद्रों पर 66 हजार से अधिक छात्र देंगे परीक्षा

सहारनपुर में मिर्जापुर पुलिस ने 1.5 ग्राम अवैध चरस के साथ नशा-तस्कर को गिरफ्तार किया

सहारनपुर (मिर्जापुर)। सहारनपुर जनपद की थाना मिर्जापुर पुलिस ने एक नशा-तस्कर अभियुक्त को करीब 1.50 ग्राम अवैध चरस के साथ...
उत्तर प्रदेश  सहारनपुर 
सहारनपुर में मिर्जापुर पुलिस ने 1.5 ग्राम अवैध चरस के साथ नशा-तस्कर को गिरफ्तार किया

देवबंद में सोशल मीडिया पर नफरत फैलाने के आरोप में वांछित आरोपी अब्दुल रज्जाक गिरफ्तार

देवबंद (सहारनपुर)। सोशल मीडिया अकाउंट पर सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने  को नफरत फैलाने वाले पोस्ट डालने के आरोप में वांछित आरोपी...
उत्तर प्रदेश  सहारनपुर 
देवबंद में सोशल मीडिया पर नफरत फैलाने के आरोप में वांछित आरोपी अब्दुल रज्जाक गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश

सहारनपुर: यूपी बोर्ड परीक्षाओं के लिए प्रशासन मुस्तैद, 89 केंद्रों पर 66 हजार से अधिक छात्र देंगे परीक्षा

सहारनपुर। जनपद में 18 फरवरी से शुरू होने जा रही यूपी बोर्ड की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षाओं को लेकर प्रशासन...
उत्तर प्रदेश  सहारनपुर 
सहारनपुर: यूपी बोर्ड परीक्षाओं के लिए प्रशासन मुस्तैद, 89 केंद्रों पर 66 हजार से अधिक छात्र देंगे परीक्षा

सहारनपुर में मिर्जापुर पुलिस ने 1.5 ग्राम अवैध चरस के साथ नशा-तस्कर को गिरफ्तार किया

सहारनपुर (मिर्जापुर)। सहारनपुर जनपद की थाना मिर्जापुर पुलिस ने एक नशा-तस्कर अभियुक्त को करीब 1.50 ग्राम अवैध चरस के साथ...
उत्तर प्रदेश  सहारनपुर 
सहारनपुर में मिर्जापुर पुलिस ने 1.5 ग्राम अवैध चरस के साथ नशा-तस्कर को गिरफ्तार किया

देवबंद में सोशल मीडिया पर नफरत फैलाने के आरोप में वांछित आरोपी अब्दुल रज्जाक गिरफ्तार

देवबंद (सहारनपुर)। सोशल मीडिया अकाउंट पर सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने  को नफरत फैलाने वाले पोस्ट डालने के आरोप में वांछित आरोपी...
उत्तर प्रदेश  सहारनपुर 
देवबंद में सोशल मीडिया पर नफरत फैलाने के आरोप में वांछित आरोपी अब्दुल रज्जाक गिरफ्तार

अखिलेश यादव का बड़ा बयान: चुनाव से पहले बीजेपी पर ‘वोट कटवाने’ की राजनीति का आरोप

   लखनऊ। प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान समाजवादी पार्टी प्रमुख ने केंद्र और राज्य की सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी पर गंभीर आरोप...
उत्तर प्रदेश  लखनऊ 
अखिलेश यादव का बड़ा बयान: चुनाव से पहले बीजेपी पर ‘वोट कटवाने’ की राजनीति का आरोप