मुजफ्फरनगर: शुक्रताल वन रेंज में पेड़ों की कटाई और वन भूमि पर अवैध खेती के आरोप, भाकियू ने डीएम को सौंपा ज्ञापन

मुजफ्फरनगर। तीर्थ नगरी शुक्रताल के जंगलों में वन विभाग की भूमि पर अवैध कब्जे, पेड़ों के कटान और प्लॉटिंग के गंभीर आरोपों ने जिले के प्रशासनिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। सोमवार को भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) के कार्यकर्ताओं ने जिला कलेक्ट्रेट पहुंचकर जिलाधिकारी को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा और वन विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों पर भ्रष्टाचार के सनसनीखेज आरोप लगाए।
सरकारी जमीन पर लहलहा रही है गेहूं और गन्ने की फसल
ये भी पढ़ें मुजफ्फरनगर: पुलिस भर्ती के नाम पर 3 करोड़ की ठगी का ऑडियो वायरल, ठग ताहिर उर्फ काला ने कबूला गुनाहभाकियू अराजनैतिक के ब्लॉक अध्यक्ष अंकित जावला के नेतृत्व में पहुंचे कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि शुक्रताल क्षेत्र में नदी पार बूकड़ी के जंगल में लगभग 1200 बीघा सरकारी जमीन पर अवैध रूप से खेती की जा रही है। कार्यकर्ताओं का दावा है कि वन विभाग के रेंजर की मिलीभगत से इस सुरक्षित वन क्षेत्र में गेहूं और गन्ने की फसल उगाई जा रही है। इतना ही नहीं, तीर्थ नगरी के आसपास की बेशकीमती वन भूमि पर अवैध प्लॉटिंग कर उसे खुर्द-बुर्द करने का खेल भी धड़ल्ले से चल रहा है।
वन सिपाही पर पेड़ों के कटान और अवैध वसूली का आरोप
ये भी पढ़ें मुजफ्फरनगर: वरिष्ठ अधिवक्ता चंद्रपाल सिंह सिरोही के पुत्र ने की आत्महत्या, क्षेत्र में शोक की लहरशिकायतकर्ताओं ने वन विभाग के सिपाही अमित कुमार पर पद के दुरुपयोग के गंभीर आरोप जड़े हैं। आरोप है कि सिपाही ने हाजीपुर क्षेत्र में खड़े शीशम के पुराने और कीमती पेड़ों को अवैध रूप से कटवा दिया। साथ ही, सिपाही पर शिवधाम के पास खरीदे गए एक निजी प्लॉट में वन विभाग की जमीन से मिट्टी उठवाकर भराव कराने का भी आरोप है, जिसका वीडियो साक्ष्य के तौर पर जिलाधिकारी को सौंपा गया है। शिकायत में एक महिला का वीडियो भी शामिल है, जिसमें उसने सिपाही पर 40 हजार रुपये की मांग करने का आरोप लगाया है।
कार्रवाई न होने पर बड़े आंदोलन की चेतावनी
बता दें कि दो दिन पहले भी भाकियू कार्यकर्ताओं ने जानसठ तहसील मुख्यालय स्थित वन विभाग के कार्यालय पर प्रदर्शन किया था, लेकिन कोई संतोषजनक कार्रवाई न होने पर सोमवार को कलेक्ट्रेट में कूच किया गया। अंकित जावला ने प्रशासन को अल्टीमेटम देते हुए कहा कि यदि 7 दिनों के भीतर दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई और जांच शुरू नहीं हुई, तो संगठन बड़े स्तर पर आंदोलन करने को मजबूर होगा।
जिलाधिकारी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच के आदेश दिए हैं और साक्ष्यों के आधार पर निष्पक्ष कार्रवाई का आश्वासन दिया है। इस खुलासे के बाद वन विभाग के स्थानीय महकमे में हड़कंप मचा हुआ है।
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