मुजफ्फरनगर नगरपालिका में भ्रष्टाचार की परत-दर-परत खुलती पोल, पार्किंग से लेकर टेंडर तक ‘खास’ ठेकेदारों का खेल उजागर, बीजेपी सभासद ने उठाया मुद्दा
मुज़फ्फरनगर। मुजफ्फरनगर नगर पालिका परिषद में भ्रष्टाचार को लेकर रोज़ नए-नए विवाद सामने आ रहे हैं। एक ओर जहां बीते दिन भाजपा के सभासदों योगेश मित्तल, मनोज वर्मा, सीमा जैन, राजीव शर्मा सहित कई सभासदों ने अधिशासी अधिकारी प्रज्ञा सिंह को ज्ञापन सौंपकर पालिका में अनियमितताओं के आरोप लगाए थे, वहीं अब भाजपा के ब्रह्मपुरी वार्ड से सभासद देवेश कौशिक ने पालिका की पार्किंग व्यवस्था में हुए “बड़े खेल” को उजागर कर पूरे प्रशासन को कटघरे में खड़ा कर दिया है।
फर्जी दस्तावेज़, अधूरी रकम और फिर भी संरक्षण!
शिकायत के अनुसार वर्ष 2024–25 में पार्किंग का ठेका सुनील कुमार को दिया गया था, लेकिन ठेके की पूरी धनराशि जमा नहीं की गई। इसके बावजूद न तो ठेका निरस्त किया गया और न ही कोई सख्त कार्रवाई हुई। आरोप है कि नियमों को ताक पर रखकर ठेकेदार को खुला संरक्षण दिया गया।
14 लाख में ठेका, 250% तक बढ़ाया शुल्क!
इतना ही नहीं, वर्तमान वित्तीय वर्ष 2025–26 (अक्टूबर से मार्च) के लिए पार्किंग का ठेका मात्र 14 लाख रुपये में अपने ही “पसंदीदा” ठेकेदार को दे दिया गया।
पिछले वर्ष जहां 8 घंटे की पार्किंग फीस ₹30 प्रति कार थी, उसे बढ़ाकर ₹75 प्रति कार कर दिया गया। इस मनमानी बढ़ोतरी से ठेकेदार को करीब 250 प्रतिशत तक का सीधा फायदा पहुंचाया गया, जबकि आम जनता पर आर्थिक बोझ लाद दिया गया।
टेंडर प्रक्रिया भी सवालों के घेरे में
सभासद का आरोप है कि टेंडर प्रक्रिया के दौरान दो निविदाएं आने के बावजूद नियमों के विपरीत दूसरी निविदा को निरस्त कर दिया गया और केवल एक निविदा के आधार पर ठेका आवंटित कर दिया गया। यह पूरी प्रक्रिया पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
प्रशासन में मची खलबली
लगातार सामने आ रहे भ्रष्टाचार के आरोप, भाजपा सभासदों के ज्ञापन और अब जिलाधिकारी स्तर से जांच समिति के गठन के बाद नगर पालिका प्रशासन में हड़कंप मच गया है। सूत्रों की मानें तो जांच रिपोर्ट के बाद दोषी अधिकारियों और संबंधित ठेकेदारों पर कड़ी कार्रवाई तय मानी जा रही है।
नगर पालिका में उठ रहे ये सवाल अब सिर्फ आरोप नहीं, बल्कि व्यवस्थित भ्रष्टाचार की ओर इशारा कर रहे हैं। देखना होगा कि जांच के बाद सच में कार्रवाई होती है या फाइलें फिर किसी अलमारी में दफन हो जाती हैं।
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