मौलाना साजिद रशीदी का हमला: 'अविमुक्तेश्वरानंद पर आरोपों के बाद धर्मगुरु क्यों मौन?'
नई दिल्ली। माघ मेले में प्रशासन के साथ सीधी तकरार के बाद ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को बड़ा झटका लगा है। इलाहाबाद जिला न्यायालय की पॉक्सो एक्ट की अदालत ने नाबालिग के साथ यौन उत्पीड़न के मामले में अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके शिष्यों के खिलाफ शिकायत दर्ज करने का आदेश दिया है। अब इस कड़ी में ऑल इंडिया इमाम संगठन के प्रमुख मौलाना साजिद रशीदी ने पूरे संत समाज पर निशाना साधा है। उनका कहना है कि अब तथाकथित हिंदू धर्मगुरुओं के मुंह में दही जम गई है, जो पहले छांगुर बाबा मामले पर चीख-चीख कर बोल रहे थे।
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ये भी पढ़ें मुजफ्फरनगर में विहान शोरूम मालिक की कोठी के स्विमिंग पूल में मिला चौकीदार का शव, फैली सनसनीऑल इंडिया इमाम संगठन के प्रमुख मौलाना साजिद रशीदी ने अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के बहाने हिंदू धर्म गुरुओं पर निशाना साधा है और यौन उत्पीड़न मामले में अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती का नाम आने के प्रकरण को शर्मनाक और निंदनीय बताया है। मौलाना साजिद रशीदी ने कहा, "पहले तो ऐसा लगता था कि यह व्यक्ति सच्चा और ईमानदार है, खुलकर बोलता है, लेकिन जब अदालत ने उनके खिलाफ पोक्सो अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया कि उन्होंने लड़कियों को परेशान किया है या उनके आश्रम में ऐसी घटनाएं होती हैं, तो ऐसा लगा कि इन हिंदू धार्मिक गुरुओं की, जिनकी देवताओं की तरह पूजा की जाती है, बहुत अफसोस होता है कि वे शादी नहीं करते और फिर लड़कियों को इस तरह परेशान करते हैं।
कुछ पहले से ही जेल में हैं, और कुछ जेल जाने वाले हैं।" छांगुर बाबा का उदाहरण देते हुए उन्होंने सवाल किया कि अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की जगह अगर कोई मुस्लिम होता तो क्या होता। उन्होंने आगे कहा कि छांगुर बाबा मामले को देख लीजिए। धर्मांतरण के मामले पर सारे धर्मगुरुओं ने मिलकर आवाज उठाई थी, कोहराम मचा दिया था, लेकिन आज किसी को नहीं पता कि छांगुर बाबा कौन है, कहां है, और क्या हुआ था उसके साथ। धर्मगुरुओं पर कटाक्ष करते हुए मौलाना ने कहा कि अब हिंदू धर्मगुरुओं के मुंह में दही जम गई है क्योंकि इनके समाज के बड़े शंकराचार्य का नाम आया है। अब कोई कुछ नहीं बोलेगा। अब उन्हें छोटी बच्चियों की फिक्र नहीं हो रही।
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लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

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