निशाने पर लाल किला और मंदिर, एआई समिट के बीच दिल्ली आए थे 4 संदिग्ध, आतंकी मॉड्यूल पर नया खुलासा
नई दिल्ली। सुरक्षा एजेंसियों ने बड़े आईएसआई समर्थित आतंकी साजिश का भंडाफोड़ करते हुए पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु से अब तक आठ लोगों को गिरफ्तार किया है। दिल्ली पुलिस के सूत्रों ने खुलासा किया कि चार संदिग्ध 'इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट' के बीच दिल्ली पहुंचे थे और उन्होंने 'फ्री कश्मीर' के पोस्टर लगाए। शहर के कई इलाकों में रेकी भी की थी। सूत्रों के अनुसार, गिरफ्तार किए गए लोग बांग्लादेश स्थित आतंकी संगठनों से जुड़े हैं और उन्हें आईएसआई से फंडिंग मिल रही थी। ये सभी संदिग्ध सोशल मीडिया के जरिए एक-दूसरे के संपर्क में थे। शुरुआती जांच से पता चला है कि ये लोग भारत के अलग-अलग हिस्सों में हमलों की साजिश रच रहे थे। 8 में से चार लोगों का एक ग्रुप दिल्ली आया और एआई समिट के दौरान मेट्रो स्टेशन पर फ्री कश्मीर और दूसरे विवादित पोस्टर लगाए।
इसके बाद वे वापस तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल चले गए। संदिग्धों की गिरफ्तारियां तमिलनाडु के तिरुप्पुर जिले की एक गारमेंट फैक्ट्री और पश्चिम बंगाल से की गईं। पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार लोगों में से एक बांग्लादेशी नागरिक है। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान मिजानुर रहमान, मोहम्मद शबात, उमर, मोहम्मद लितान, मोहम्मद शाहिद और मोहम्मद उज्जल के रूप में हुई है। ये गिरफ्तारियां ऐसे समय में हुई हैं जब खुफिया एजेंसियों ने चेतावनी दी थी कि आईएसआई समर्थित लश्कर-ए-तैयबा देश में हमलों की श्रृंखला को अंजाम देने के लिए लोकल मॉड्यूल तैयार कर रहा है।
एक अन्य अलर्ट में कहा गया था कि लश्कर-ए-तैयबा लाल किले के आसपास हमले की साजिश रच रहा है। दिल्ली पुलिस के सूत्रों का दावा है कि आरोपी सोशल मीडिया पर पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठनों के समर्थन में सामग्री पोस्ट कर रहे थे। सभी गिरफ्तार लोगों ने अपनी पहचान छिपा रखी थी और गारमेंट फैक्ट्री में काम कर रहे थे। पुलिस के अनुसार, वे फर्जी आधार कार्ड का इस्तेमाल कर रहे थे। छापेमारी के दौरान पुलिस ने आठ मोबाइल फोन और 16 सिम कार्ड बरामद किए। खुफिया एजेंसियों के एक अन्य अलर्ट में उत्तर भारत के मंदिरों को निशाना बनाने की साजिश का भी जिक्र है। दिल्ली पुलिस इन आरोपियों से इस साजिश के बारे में भी पूछताछ करेगी। पुलिस यह जानने की कोशिश करेगी कि उन्होंने किन-किन स्थानों की रेकी की थी।
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लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

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