दिल्ली दंगे: 'वैश्विक पैटर्न' और 'टूलकिट' साजिश का हिस्सा? जानें विशेषज्ञों की राय
नई दिल्ली। ‘ग्रुप ऑफ इंटेलेक्चुअल्स एंड एकेडेमिशियन्स (जीआईए)’ की ओर से दिल्ली स्थित इंडियन लॉ इंस्टीट्यूट में दिल्ली दंगों की छठी बरसी के अवसर पर एक विचार मंथन आयोजित किया गया। इसमें सम्मिलित विशेषज्ञों ने वर्ष 2020 में हुए दिल्ली दंगों को केवल स्थानीय हिंसा नहीं बल्कि एक ‘सुनियोजित’, 'सूचना युद्ध' और 'शासन परिवर्तन' का वैश्विक प्रयास करार दिया है।
दिल्ली के पूर्व पुलिस आयुक्त एसएन श्रीवास्तव ने कहा कि दिल्ली दंगे एक व्यापक वैश्विक पैटर्न का हिस्सा थे, जहां दंगों का उपयोग शासन परिवर्तन के साधन के रूप में किया जाता है। उन्होंने ऐसे दंगों के दौरान पुलिस के समक्ष आने वाली चुनौतियों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि दिल्ली में दंगाइयों को पुलिस की संभावित कठोर कार्रवाई की अपेक्षा थी, जिससे विरोध प्रदर्शन को और भड़काया जा सके जैसा कि बांग्लादेश और नेपाल में देखने को मिला।
पूर्व रॉ प्रमुख संजीव त्रिपाठी ने ‘पाँचवीं पीढ़ी के सूचना युद्ध’ की अवधारणा पर प्रकाश डाला और बताया कि आधुनिक हाइब्रिड संघर्षों में दंगे किस प्रकार नैरेटिव निर्माण, मनोवैज्ञानिक अभियानों तथा रणनीतिक दुष्प्रचार के माध्यम के रूप में प्रयुक्त होते हैं।
ये भी पढ़ें निशाने पर लाल किला और मंदिर, एआई समिट के बीच दिल्ली आए थे 4 संदिग्ध, आतंकी मॉड्यूल पर नया खुलासाराजदूत वीना सिकरी ने बांग्लादेश मॉडल का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसे घटनाक्रमों में सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न यह होता है कि नैरेटिव पर नियंत्रण किसके पास है। उन्होंने रेखांकित किया कि धारणा निर्माण और अंतरराष्ट्रीय संदेश-प्रबंधन राजनीतिक परिणामों को प्रभावित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
जीआईए की संयोजक मोनिका अरोड़ा ने कहा कि दिल्ली दंगे एक ‘प्रयोग’ थे, जिनका उद्देश्य शासन को अस्थिर करना था। उन्होंने इस विषय पर निरंतर शैक्षणिक अध्ययन और जन-जागरूकता की आवश्यकता पर बल दिया।
प्रमुख नागरिक चंदर वाधवान ने तथाकथित ‘डीप स्टेट’ की भूमिका का विश्लेषण प्रस्तुत किया और उसके संभावित प्रभावों पर विचार व्यक्त किए। इस आयोजन में सेवानिवृत्त राजदूतों, वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों, अधिवक्ताओं एवं प्रबुद्ध नागरिकों सहित विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ शामिल थे।
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लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

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