गणतंत्र दिवस परेड में पहली बार शामिल हुई बीएसएफ की महिला ऊंटसवार टुकड़ी
नई दिल्ली। गणतंत्र दिवस परेड में कर्तव्य पथ पर इस साल एक अनोखा नजारा दिखा जब पहली बार इतिहास में गणतंत्र दिवस की परेड में सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के ऊंट सवारों की टुकड़ी में महिलाएं नजर आईं। 26 जनवरी यानी गणतंत्र दिवस की परेड में गुरुवार को बीएसएफ की ऊंट सवार टुकड़ी मुख्य आकर्षण […]
नई दिल्ली। गणतंत्र दिवस परेड में कर्तव्य पथ पर इस साल एक अनोखा नजारा दिखा जब पहली बार इतिहास में गणतंत्र दिवस की परेड में सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के ऊंट सवारों की टुकड़ी में महिलाएं नजर आईं। 26 जनवरी यानी गणतंत्र दिवस की परेड में गुरुवार को बीएसएफ की ऊंट सवार टुकड़ी मुख्य आकर्षण का केंद्र रही। दरअसल पहली बार सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) की ऊंट सवार टुकड़ी में बल की महिला कर्मियों ने पुरुष जवानों के साथ भाग लिया। राजस्थान में प्रशिक्षित हुई और राजसी पोशाक पहने ये महिला टुकड़ी परेड में सभी का ध्यान आकर्षित कर रही थी।
बीएसएफ ने बताया कि प्रख्यात डिजाइनर राघवेंद्र राठौड़ ने इन महिला ऊंटसवारों की पोशाक तैयार की थी, जिसमें देश के अलग-अलग हिस्सों की लोक संस्कृति की झलक दिखाई दी। बता दें कि इसी महिला टुकड़ी को राजस्थान में भारत-पाकिस्तान सीमा पर भी तैनात रहकर देश के दुश्मनों से लोहा लेने का जिम्मा सौंपा गया है।
एक अधिकारी ने बताया कि बीएसएफ के पूर्व महानिदेशक पंकज कुमार सिंह के निर्देश पर 15-20 महिलाकर्मियों को ऊंटसवार टुकड़ी में शामिल होने का प्रशिक्षण दिया गया था। देश में महिला जवानों का पहला ऊंट जत्था राजस्थान के खाजूवाला में 25 सितंबर को लॉन्च किया गया था। यही जत्था पहली बार गणतंत्र दिवस परेड में शामिल हुआ है।
रॉयल बुलेटिन से जुड़ें:
देश-प्रदेश की ताज़ा ख़बरों को सबसे पहले पढ़ने के लिए हमारे सोशल मीडिया हैंडल को फॉलो करें:
आपको यह खबर कैसी लगी? अपनी राय नीचे कमेंट बॉक्स में ज़रूर दे। आपकी राय रॉयल बुलेटिन को और बेहतर बनाने में बहुत उपयोगी होगी।
संबंधित खबरें
लेखक के बारे में
रॉयल बुलेटिन के संस्थापक एवं मुख्य संपादक अनिल रॉयल ने वर्ष 1985 में मात्र 17 वर्ष की आयु से मुज़फ्फरनगर की पावन भूमि से निर्भीक और जनपक्षधर पत्रकारिता का संकल्प लिया। बीते लगभग चार दशकों से वे पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सशक्त और विश्वसनीय आवाज़ के रूप में पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं।
पत्रकारिता के अपने लंबे अनुभव के आधार पर उन्होंने वर्ष 2010 में नोएडा से रॉयल बुलेटिन के प्रिंट संस्करण का सफल विस्तार किया। समय के साथ बदलते मीडिया परिदृश्य को समझते हुए, उनके नेतृत्व में यह संस्थान आज एक मजबूत और प्रभावशाली डिजिटल समाचार मंच के रूप में स्थापित हो चुका है।
वर्तमान में रॉयल बुलेटिन की पहुँच न्यूज़ पोर्टल, फेसबुक, यूट्यूब, इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप सहित सभी प्रमुख डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर करोड़ों पाठकों तक है। प्रिंट और डिजिटल मीडिया के स्वामी एवं संपादक के रूप में अनुभव, सत्यनिष्ठा और जन-सरोकार उनकी पत्रकारिता की मूल आधारशिला रहे हैं।

टिप्पणियां