लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव की तैयारी, विपक्ष ने कहा- भेदभाव के साथ दबाई जा रही आवाज
लोकसभा की कार्यवाही दिनभर के लिए स्थगित
नई दिल्ली। विपक्ष ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाए जाने की तैयारी की है। विपक्षी सदस्यों ने आरोप लगाए कि सरकार के सदस्य कुछ भी कह सकते हैं, लेकिन नेता प्रतिपक्ष को सदन में बोलने नहीं दिया जा रहा है। कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने कहा कि संसदीय नियमों के अनुसार, नेता प्रतिपक्ष एक शैडो प्रधानमंत्री होता है। लेकिन यहां नेता प्रतिपक्ष को सदन में बोलने नहीं दिया जा रहा है। सरकार कुछ भी कह सकती है और किसी पर भी हमला कर सकती है।
उन्होंने कहा कि स्पीकर खुद कांग्रेस की महिला सांसदों पर आरोप लगा रहे हैं, लेकिन इस सदन में विपक्ष के लिए बिल्कुल भी जगह नहीं है और उन्हें बोलने भी नहीं दिया जा रहा है। वेणुगोपाल ने यह भी कहा कि संसद में विपक्ष के खिलाफ इस तरह का रवैया पहले कभी नहीं हुआ। कांग्रेस सांसद सुखदेव भगत ने कहा कि चेयर एक संवैधानिक पद है। यह सत्ताधारी पार्टी का नहीं है। जिस तरह से विपक्ष के नेता की आवाज को भेदभाव के साथ दबाया जा रहा है, वह बहुत चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि यह संसद है, सेंसर बोर्ड नहीं है।
अविश्वास प्रस्ताव के विषय पर समाजवादी पार्टी सांसद डिंपल यादव ने कहा कि जो भी 'इंडिया' गठबंधन के वरिष्ठ नेता निर्णय लेंगे, सभी उसी पर रहेंगे और मानेंगे। उन्होंने कहा, "हमें लगातार देखने को मिला है कि जब से भाजपा आई है, सत्तापक्ष के कभी माइक बंद नहीं होते, लेकिन विपक्ष के नेताओं और सांसदों का माइक बंद किया जाता है। तो अगर अविश्वास प्रस्ताव लाना है तो 'इंडिया' गठबंधन मिलकर ही ये प्रस्ताव लाएगा।"
इसी बीच, शिरोमणि अकाली दल सांसद हरसिमरत कौर बादल ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, "मैंने 18 साल में ऐसा नहीं देखा जिस तरह यह सदन चलाया जा रहा है। सरकार और स्पीकर से मैं गुजारिश करती हूं कि जो यहां सांसद हैं उन्हें लोगों ने चुनकर भेजा है, उन्हें बोलने का मौका दिया जाना चाहिए।" उन्होंने सवाल किया कि जब आप बोलने ही नहीं देंगे तो इस सदन में लोगों का पैसा क्यों खर्च किया जा रहा है? हर सदस्य को सदन में अपनी बात रखने का हक है।
हरसिमरत कौर बादल ने यह भी कहा कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौता में देश को गुमराह किया गया है। आप (भाजपा) देश के किसानों को बर्बाद करके देश आबाद नहीं कर सकते। उन्होंने आग्रह करते हुए कहा कि सरकार विपक्ष को बोलने दे, अगर विपक्ष को बोलने ही नहीं दिया जाएगा तो यह संसद क्यों बनाई है?
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लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

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