खौफनाक! सरकारी विद्यालय में छह बर्षीय बच्ची की दो उंगलियां कटीं, माता-पिता ने कर्मचारियों पर लगाया लापरवाही का आरोप
स्कूल स्टाफ ने कटी हुई उंगलियों को उठाकर फेंका
बेंगलुरु। कर्नाटक में तुमकुरु जिले के एक सरकारी स्कूल में अपराह्न के भोजन के दौरान हुए हादसे में छह साल की एक बच्ची की दो उंगलियां कट गयीं। बच्ची के माता-पिता ने विद्यालय के अधिकारियों पर बड़ी लापरवाही का आरोप लगाया है। यह घटना नौ फरवरी को गुलुरु गांव के सरकारी मॉडल उच्च प्राथमिक विद्यालय में घटित हुई। हादसे के वक्त प्रथम कक्षा की विद्यार्थी चिन्मयीदेवी का हाथ लंच के लिए लाइन में लगते समय लोहे के दरवाजे के गैप में फंस गया।
उसकी मां जीएच अम्भिका के मुताबिक दरवाजे को पीछे से धक्का दिया गया, जिससे उसकी दो उंगलियां कट गईं। माता-पिता ने विद्यालय के अधिकारियों पर बड़ी लापरवाही का आरोप लगाया है। उनका दावा है कि कटी हुई उंगलियों को कर्मचारी ने फेंक दिया।
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अम्भिका ने आरोप लगाया कि अपराह्न करीब 2.30 बजे एक शिक्षक ने फोन करके इसे ‘मामूली चोट’ बताया, लेकिन विद्यालय पहुंचने पर माता-पिता ने बच्ची को बेहोश और खून बहता हुआ पाया। उन्होंने आरोप लगाया कि तुरंत कोई चिकित्सा मदद नहीं दी गई और बच्ची को उसके माता-पिता के आने तक विद्यालय परिसर में ही रखा गया।
बाद में बच्ची को उसके पिता की मोटरसाइकिल पर तुमकुरु सरकारी अस्पताल ले जाया गया। माता-पिता ने प्रधानाध्यापक नागेश, शिक्षक, हादसे के समय बच्चों की देखभाल करने वाले वेंकटेश और प्रखंड शिक्षा अधिकारी हनुमंथप्पा के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने आरोप लगाया कि जब उन्होंने कटी हुई उंगलियां मांगीं, तो कर्मचारी ने कहा कि दूसरे बच्चों को "डराने" से बचने के लिए उन्हें फेंक दिया गया था।
इसके अलावा शिकायत में कहा गया है कि जब एक स्थानीय ग्राम पंचायत सदस्य ने इस घटना के बारे में बीईओ से संपर्क किया, तो हनुमंथप्पा ने कथित तौर पर मामले को टाल दिया और कॉल खत्म करने से पहले जाति-आधारित अपमानजनक टिप्पणी की।
इस सिलसिले में तुमकुरु ग्रामीण थाने में भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 125(a), 238, और 190 के साथ-साथ जुवेनाइल जस्टिस एक्ट की धारा 75 के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है। अभी जांच चल रही है।
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लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

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