राजकाज

हमारे ज्योतिषी

पं. ब्रज बिहारी अत्री
पं. ब्रज बिहारी अत्री
संजय सक्सेना
संजय सक्सेना
पं. अरविन्द पांडेय
पं. अरविन्द पांडेय

यूपी की राजनीति में फिर 'सोशल इंजीनियरिंग' की आहट: 2007 दोहराने की तैयारी में मायावती; दलित, ब्राह्मण और मुस्लिम त्रिकोण बना भाजपा-सपा की चुनौती

उत्तर प्रदेश में बहुजन समाज पार्टी करीब 15 सालों से सत्ता से बाहर है। 2007 से 2012 तक सत्ता में रही बसपा को पिछले तीन विधानसभा चुनाव में हार का सामना करना पड़ा है। इस दौरान तीन लोकसभा चुनाव में...
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संकल्प, साधना, सेवा और समर्पण का प्रतीक है राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ

  (विष्णु दत्त शर्मा-विनायक फीचर्स)                      देश में संगठन और आंदोलन आते-जाते रहे हैं। कुछ समय के साथ क्षीण हुए तो कुछ परिस्थितियों की आँधियों में बह गए और कुछ अपने मूल ध्येय को भूलकर अस्तित्वहीन हो गए। परंतु विश्व के संगठनात्मक...
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नरेंद्र मोदी होना आसान नहीं, प्रधानमंत्री की चुनौतियां और संघर्ष, मोदी के नेतृत्व की खास बातें

नरेन्द्र दामोदरदास मोदी का नाम आज पूरी दुनिया में गूंज रहा है, भारत में बच्चे-बच्चे  के मुंह पर मोदी का नाम चढ़ गया है । कितने ही देशों में जनता की मांग होती है कि उन्हें भी मोदी जैसा नेता...
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भूदान आंदोलन के प्रणेता आचार्य विनोबा भावे

  1947 में हमारा देश आजाद हुआ। अंग्रेज तो चले गए पर पीछे छोड़ गए एक ऐसा रूढ़िवादी भारतीय समाज जो अशिक्षा, जाति व्यवस्था और भयंकर गरीबी के संकट से जूझ रहा था। यकीनन जिससे निजात पाने के लिए अभी                         -निमिषा...
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अगले सौ साल में क्या चाहता है संघ ?, सरसंघचालक ने बताए संघ के अगली शताब्दी के लक्ष्य

-सर्वेश कुमार सिंह  राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डा. मोहन भागवत ने तीन दिन की व्य़ाख्यानमाला में संघ के सम्बन्ध में व्याप्त अनेक भ्रांतियों को तो दूर किया ही, उन्होंने संघ के सौ वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर अगले...
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मोदी-ट्रंप रिश्तों में दरार: टैरिफ विवाद से रणनीतिक समीकरणों तक

- अशोक कुमार झा जर्मनी के प्रतिष्ठित अख़बार  फ्रैंकफर्टर आल्गेमाइने साइटुंग (FAZ)  ने हाल ही में सनसनीखेज दावा किया है कि डोनाल्ड ट्रंप ने चार बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को फोन करने की कोशिश की, लेकिन मोदी ने...
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भारत की एकता- अखंडता को समर्पित युगपुरुष डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी

कुछ व्यक्तित्व ऐसे होते हैं, जो अपने विचारों, संघर्षों और बलिदानों से समय की धारा को मोड़ने का संकल्प रखते हैं। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ऐसे ही युगपुरुष थे, जिनकी राष्ट्रभक्ति, दूरदृष्टि और दृढ़ संकल्प ने भारत की एकता-अखंडता को सुदृढ़ किया। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ऐसे ही एक युगदृष्टा थे, जिनका जीवन भारत की […]
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सेलिब्रिटी सांसद बनाम ज़मीनी नेता मंडी ने BJP को दिखा दी सियासी सच्चाई

हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में 30 जून और 1 जुलाई को जो जलप्रलय टूटा, उसने न केवल सड़कों, घरों और पुलों को बहा दिया, बल्कि सत्ता और जनप्रतिनिधियों के ज़मीर को भी बहते हुए उजागर कर दिया। जब सराज घाटी, थुनाग और जंजैहली जैसे क्षेत्र बाढ़ और भूस्खलन से जूझ रहे थे, तब इस […]
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आजादी की ओर बढ़ता बलूचिस्तान

हुसैनी वाला के पार से प्राप्त सूचनाओं के अनुसार इस समय बलूचिस्तान ज्वालामुखी के मुहाने पर बैठा है। पिछले दिनों बलूच विद्रोहियों ने ट्रेन का अपहरण और फिर फौजी सैनिकों पर बड़ा हमला करके पाकिस्तानी फौज को जो चोट पहुंचाई है उससे न केवल पाकिस्तान बल्कि पूरा विश्व हिल गया है। बलूच लोगों का कहना […]
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बिहार चुनाव : बुजुर्गों की विदाई तय,युवाओं के सिर सजेगा “ताज”

-प्रदीप कुमार वर्मा देश और दुनिया में प्राचीन ज्ञान एवं शिक्षा के केंद्र नालंदा एवं विक्रमशिला विश्वविद्यालय के लिए चर्चित बिहार में “बुजुर्गों” की राजनीति के दिन अब पूरे होते दिख रहे हैं। राष्ट्रीय जनता दल के सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव की बढ़ती उम्र और खराब स्वास्थ्य के चलते उनकी राजनीतिक सक्रियता अब ना के बराबर है। वहीं,समाजवादी आंदोलन से निकले दूसरे बड़े चेहरे रामविलास पासवान के पुत्र और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान की एंट्री भी अब बिहार के दंगल में हो गई है। इसी प्रकार वर्तमान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के भी बुजुर्ग तथा बीमार होने की बात कही जा रही है जिसके चलते भी अब उनके राजनीतिक “वारिस” की तलाश की जा रही है। ऐसे में बिहार की राजनीति से बुजुर्गों की विदाई तय है। साथ ही यह भी माना जा रहा है कि इस साल के आखिर में होने वाले बिहार विधानसभा चुनाव में राजनीति में युवाओं के रूप में नए चेहरों की “भागीदारी” महत्वपूर्ण रहेगी तथा बतौर मुख्यमंत्री किसी नए चेहरे के सिर पर सत्ता का “ताज” सज सकता है।          बिहार की सियासत की बात करें तो वर्तमान में  बिहार में सक्रिय विभिन्न राजनीतिक दलों में इन दिनों पार्टी की कमान युवा चेहरों के हाथ है। चारा घोटाले में लालू यादव के सजायाफ्ता होने तथा उम्रदराज होने के बाद उनके पुत्र तेजस्वी यादव ने पार्टी की बागडोर संभाल रखी है। लालू यादव अब पार्टी में महज मार्गदर्शक की भूमिका में हैं। आज से करीब दस वर्ष पूर्व 2015 में ही राजनीति में तेजस्वी यादव की एंट्री हो गई थी। बीते बिहार विधानसभा के चुनाव के दौरान तेजस्वी यादव राजनीति की लाइमलाइट में आए थे। तब उन्होंने कांग्रेस सहित अन्य गैर भाजपाई दलों के साथ बिहार में “महागठबंधन” बना कर चुनाव लड़ा और खासी कामयाबी हासिल की। तब चुनावी राजनीति में पहली बार ही बेहतर प्रबंधन करते हुए तेजस्वी की अगुवाई में आरजेडी को 75 सीटें मिली थी। अब एक बार फिर बिहार विधानसभा चुनाव के लिए तेजस्वी की कमान में राष्ट्रीय जनता दल पूरी तरह तैयार है और उनके आक्रामक तेवर पार्टी कार्यकर्ताओं में एक नया जोश भर रहे हैं।            इस साल की शुरुआत में ही जनता दल यूनाइटेड के नेताओं ने वर्तमान मुख्यमंत्री नितीश कुमार के चेहरे पर ही एक बार फिर से चुनाव लड़ने की बात छेड़कर गठबंधन की राजनीति को गर्मा दिया है। जनता दल यूनाइटेड का एक धड़ा नीतीश कुमार के पुत्र को राजनीति में लाने की बात कह रहा है। पेशे से इंजीनियर नीतीश कुमार के पुत्र निशांत कुमार सक्रिय राजनीति से अभी तक दूर ही रहते आए हैं। कई बार निशांत खुद भी इस बात का एलान कर चुके हैं कि वो कभी भी अपने पिता की तरह राजनीति में नहीं आएंगे। लेकिन राजनीति संभावनाओं का खेल है और बिहार की राजनीति के जानकार इस बात को मानते हैं कि देर सवेर-सही निशांत कुमार का सक्रिय राजनीति में प्रवेश होकर ही रहेगा। ऐसे में भाजपा एवं जनता दल यूनाइटेड सहित समूचा एनडीए निशांत कुमार को भावी युवा मुख्यमंत्री के तौर पर प्रस्तुत कर सकता है।उधर,बिहार की राजनीति में समाजवादी आंदोलन से निकले एक दूसरे कद्दावर नेता रामविलास पासवान साल 2019 में लोकसभा चुनाव के दौरान ही अपने पुत्र चिराग पासवान को सियासत में उतार चुके थे।         इस दौरान पार्टी के सारे फैसले चिराग ही लेते रहे। पिता रामविलास पासवान की मौत के बाद उनके चाचा पशुपति पारस ने धोखा दिया और चिराग अकेले पड़ गए। इसके बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। चिराग ने अपनी ताकत का एहसास 2020 के विधानसभा चुनाव में नीतीश कुमार को करा दिया। अब बदले हालात में अपने दम पर चिराग पासवान दो भागों में अब बंट चुकी लोजपा के एक धड़े लोजपा (राम विलास) का नेतृत्व कर रहे हैं।  खुद को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का हनुमान बताने वाले चिराग पासवान ने “बिहार एवं बिहारी फर्स्ट” का नारा एक बार दोहराते हुए बिहार विधानसभा में चुनाव लड़ने की बात कही है। बिहार के दंगल में चिराग पासवान की एंट्री से  विधानसभा चुनाव में बिहार में खुद की अगुवाई में अपनी पार्टी के विस्तार के साथ-साथ अपनी प्रभावी मौजूदगी दर्ज करने की कोशिश चिराग की रहेगी।        बिहार में महागठबंधन में शामिल कांग्रेस अपने स्वतंत्र अस्तित्व के बजाय महागठबंधन के जरिए ही कांग्रेस अपनी उपस्थिति दर्ज कर रही है। वर्ष 2019 में सीपीआई से कांग्रेस में गए कन्हैया कुमार इन दोनों बिहार में कांग्रेस के पोस्टर बॉय हैं। कन्हैया मूल रूप से बिहार के बेगूसराय के रहने वाले हैं तथा जेएनयू छात्र संघ के वे अध्यक्ष भी रह चुके हैं। नयी सोच के साथ बिहार को आगे बढ़ाने में कन्हैया की भूमिका हो सकती है। कांग्रेस ने बिहार में जो सांगठनिक बदलाव किए हैं, वह कन्हैया कुमार के अनुकूल है तथा इस लगता है कि कांग्रेस बिहार में अपने पारंपरिक वोट बैंक की ओर लौट रही है और सवर्णों को एक बार फिर तरजीह देने की कांग्रेस ने योजना बनाई है। कन्हैया कुमार भी सवर्ण भूमिहार हैं। और कन्हैया कुमार की दमपरी कांग्रेस अब बिहार के चुनावी महाभारत में जीत का परचम लहराना चाहती है। बिहार विधानसभा चुनाव की कवायद में चुनावी रणनीतिकार से पॉलिटिशियन बने प्रशांत किशोर उर्फ पीके बिहार में वैकल्पिक राजनीति की जमीन तैयार करने में जुटे हैं।           एक कुशल रणनीतिकार के तौर पर उन्होंने ममता बनर्जी और नीतीश कुमार के लिए काम किया तथा दोनों को चुनावी सफलता भी दिलाई। पीके ने पिछले साल गांधी जयंती पर दो अक्टूबर से वैकल्पिक राजनीति पर काम करना शुरू किया। उनकी नजर में बीते तीन दशक में बिहार पिछड़ेपन का शिकार हुआ है तथा बिहार कैसे आगे बढ़ सकता है, इसका उपाय बताने वे गांव-गांव घूम चुके हैं। पहले ही साल में पीके को कामयाबी मिली, जब सारण सुरक्षित निर्वाचन क्षेत्र से जन सुराज का समर्थित उम्मीदवार एमएलसी का चुनाव जीत गया। एक समय था जब राजनीति में  बुजुर्गों को परिपक्वता की नजरों से देखा जाता था तथा बुजुर्ग राजनीतिज्ञों का अनुभव उनकी योग्यता का पैमाना था। लेकिन बदलते वक्त के साथ अब सियासी चलन बदल रहे हैं। हाल के दिनों में दिनों में भी पीके ने बिहार लोक सेवा आयोग के पेपर लीक के बाद में परीक्षा को रद्द करने की मांग को लेकर हुए युवाओं के आंदोलन की अगुवाई भी की थी।                  राजनीति में बुजुर्गों की विदाई तथा युवा पीढ़ी को अधिक मौके देने वाली इस कवायद में सबसे पहले भाजपा ने इस बदलाव की शुरुआत की थी। भाजपा ने 75 साल के पॉलिटिशियन को रिटायर करने की इस कवायद में लालकृष्ण आडवाणी एवं मुरली मनोहर जोशी जैसे नेताओं को “मार्गदर्शक मंडल” में भेज दिया गया। हाल के दिनों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा एक लाख युवाओं को राजनीति में लाने के आह्वान किया गया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यही “राजनीतिक आह्वान”  का आगाज़ बिहार विधानसभा चुनाव से ही अमल में आ सकता है। इसके साथ ही मोदी और शाह की जोड़ी किसी नए “युवा चेहरे” को अब अप्रत्याशित रूप से भी पार्टी का चेहरा बनाकर पेश कर सकती हैं। भाजपा गठबंधन की ओर से यह नया चेहरा चिराग पासवान अथवा सम्राट चौधरी  का भी हो सकता है। यही वजह है कि अब राजनीति में पीढ़ीगत बदलाव का यह दौर अब बिहार के विधानसभा चुनाव में भी दिखाई दे सकता है, और किसी युवा के सिर पर बिहार की सत्ता का “ताज” सज सकता है,इस बात के पूरे आसार बन रहे हैं।
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सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर राष्ट्रपति मुर्मू के 14 सवाल, विधायी प्रक्रिया पर उठी संवैधानिक बहस

सुप्रीम कोर्ट के एक हालिया आदेश ने भारतीय विधायी प्रक्रिया और कार्यपालिका के संबंधों पर एक नया संवैधानिक संकट खड़ा कर दिया है। तमिलनाडु सरकार और राज्यपाल के बीच टकराव से उपजा यह मामला अब देश के राष्ट्रपति तक पहुँच गया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 8 अप्रैल 2025 को दिए गए सुप्रीम कोर्ट के […]
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भारत-पाक युद्धविराम : आर्थिक और कूटनीतिक दबावों की जीत

10 मई 2025 को दक्षिण एशिया के दो परमाणु हथियार संपन्न पड़ोसियों, भारत और पाकिस्तान, ने चार दिन की तीव्र सैन्य झड़पों के बाद पूर्ण और तत्काल युद्धविराम की घोषणा की। यह युद्धविराम, जो नियंत्रण रेखा (एलओसी) पर मिसाइल हमलों और ड्रोन युद्ध तक बढ़ चुका था, न केवल दोनों देशों की सैन्य रणनीतियों को […]
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नवीनतम समाचार

UP के IPS अफसरों का 'अनोखा' अर्थशास्त्र: साल भर में 10 करोड़ की जमीन हुई 3 करोड़ की, कोई सबसे रईस तो किसी के पास घर तक नहीं

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के रसूखदार आईपीएस अफसरों ने केंद्र सरकार के कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) को अपनी अचल संपत्ति...
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UP के IPS अफसरों का 'अनोखा' अर्थशास्त्र: साल भर में 10 करोड़ की जमीन हुई 3 करोड़ की, कोई सबसे रईस तो किसी के पास घर तक नहीं

सुरक्षा सहयोग से द्विपक्षीय भुगतान संबंधों तक, भारत और मलेशिया ने छह प्रमुख समझौतों पर लगाई मुहर

   कुआलालंपुर । भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम ने रविवार को कुआलालंपुर में द्विपक्षीय मुलाकातों...
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सुरक्षा सहयोग से द्विपक्षीय भुगतान संबंधों तक, भारत और मलेशिया ने छह प्रमुख समझौतों पर लगाई मुहर

अब भारत को तोड़ने वाले टूट जाएंगे, यह 1947 का भारत नहीं है..भारत को तोड़ने वाली ताकतें अब खुद टूट जाएंगी: डॉ. मोहन भागवत

मुंबई। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने रविवार को मुंबई में कहा कि अब भारत को तोड़ने...
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अब भारत को तोड़ने वाले टूट जाएंगे, यह 1947 का भारत नहीं है..भारत को तोड़ने वाली ताकतें अब खुद टूट जाएंगी: डॉ. मोहन भागवत

यूपी में सीएम जनसुनवाई का सच: कासगंज में न्याय नहीं, पुलिसिया दहशत, BJP नेता को गिरेबां पकड़ घसीटा गया

      कासगंज | उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री की जनसुनवाई को जनता की आख़िरी उम्मीद बताया जाता है, लेकिन कासगंज से सामने...
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यूपी में सीएम जनसुनवाई का सच: कासगंज में न्याय नहीं, पुलिसिया दहशत, BJP नेता को गिरेबां पकड़ घसीटा गया

मुज़फ्फरनगर

मुजफ्फरनगर: हिंदू स्वराज्य अधिवेशन में गूंजा राष्ट्रवाद, डॉ. संजीव बालियान ने उठाई जनसंख्या नियंत्रण कानून की मांग मुजफ्फरनगर: हिंदू स्वराज्य अधिवेशन में गूंजा राष्ट्रवाद, डॉ. संजीव बालियान ने उठाई जनसंख्या नियंत्रण कानून की मांग
मुजफ्फरनगर। जनपद के जीआईसी मैदान (सर्कुलर रोड) पर रविवार को छत्रपति शिवाजी सेना द्वारा आयोजित 'हिंदू स्वराज्य अधिवेशन' केवल एक...
मुजफ्फरनगर: बेसहारा माताओं को मिला 'अपना घर', मीनाक्षी स्वरूप ने किया उद्घाटन
देश को औरंगजेब नहीं, श्रीराम की विचारधारा चाहिए: आचार्य अचल कृष्ण
मंसूरपुर: मायके में रह रही दमकलकर्मी की पत्नी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत, परिजनों ने लगाया दहेज हत्या का आरोप
मुजफ्फरनगर में जलभराव से तंग ग्रामीणों ने सड़क पर खाट बिछाकर दिया धरना, प्रशासन के खिलाफ फूटा गुस्सा